हिंदी कविता

माँ का प्यार राकेश शंकर त्रिपाठी, कानपुर चरण पूज वंदन करें, करें आज स्वीकार ।  है माँ के इस शब्द में, निराकार- साकार ।।   माँ के ही इस कोख से, उपजा जीवन-सार ।  ब्रह्म उदित है जगत में, महिमा अपरम्पार ।।   माँ तेरे इस कोख का, मुझ पर है उपकार ।  लायी मुझको जगत में, सब कुछ है न्यौछार ।।   तेरे आँचल में बसे, खुशियों का संसार । ...