माँ का प्यार राकेश शंकर त्रिपाठी, कानपुर चरण पूज वंदन करें, करें आज स्वीकार । है माँ के इस शब्द में, निराकार- साकार ।। माँ के ही इस कोख से, उपजा जीवन-सार । ब्रह्म उदित है जगत में, महिमा अपरम्पार ।। माँ तेरे इस कोख का, मुझ पर है उपकार । लायी मुझको जगत में, सब कुछ है न्यौछार ।। तेरे आँचल में बसे, खुशियों का संसार । ...
राकेश त्रिपाठी
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काव्यानुवाद – श्रीमद्भगवद्गीता, तेरहवाँ अध्याय (क्षेत्रज्ञविभागयोग) कॉरपोरेट लर्निंग्स 1. सम्पूर्ण ज्ञान का प्राप्त होना...
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काव्यानुवाद श्रीमद्भगवद्गीता, ग्यारहवाँ अध्याय ( विश्वरूपदर्शनयोग ) कॉरपोरेट लर्निंग्स 1. भक्तिभाव से कर्मों का...
पंचायत एक गाना है – “पतझड़ सावन बसन्त बहार, एक बरस के मौसम चार,...
काव्यानुवाद श्रीमद्भगवद्गीता, ग्यारहवाँ अध्याय ( विश्वरूपदर्शनयोग ) कॉरपोरेट लर्निंग्स गीता का यह एकादश अध्याय...
काव्यानुवाद श्रीमद्भगवद्गीता, दसवाँ अध्याय (विभूति योग) गीता का यह अध्याय विभूति योग के नाम...
प्रार्थना दे रहे हैं आपको हम, दिल हृदय शुभ कामना। हर दिवस अद्भुत सदा...
