जीवन का यज्ञ — आत्मबल की ज्योति (15th Edition)
जीवन का यज्ञ आत्मबल की ज्योति नीतू तिवारी, कोलकाता बचपन तो कोमल, निर्मल, निस्वार्थ होता है,हृदय में बस प्रेम, आँखों ...
माँ का प्यार (15th Edition)
माँ का प्यार राकेश शंकर त्रिपाठी, कानपुर चरण पूज वंदन करें, करें आज स्वीकार । है माँ के इस शब्द में, निराकार- साकार ।। माँ के ही इस कोख से, उपजा जीवन-सार । ब्रह्म उदित है जगत में, महिमा अपरम्पार ।। माँ तेरे इस कोख का, मुझ पर है उपकार । लायी मुझको जगत में, सब कुछ है न्यौछार ।। तेरे आँचल में बसे, खुशियों का संसार । तेरा वैभव है अमर, बाकी सब बेकार ।। गलती कितनी भी करें, माँ का हृदय अपार । चरणों में तेरे सदा, सुख है अपरम्पार ।। जब तक माँ का प्यार है, उन्नत है यह भाल । जीवन के हर ढाल पर, आशीषों की ढाल ।। ...
बेटी (15th Edition)
बेटी पल्लवी अवस्थी, मसकट, ओमान बेटियाँ हर घर का उजियारा,माँ-पिता के दिल का सहारा,हर रिश्ते में भर्ती प्यार,इनसे ही महके ...
वंदे मातरम् : क्रांति-गाथा (15th Edition)
वंदे मातरम् क्रांति-गाथा डॉ. गिरिधर राय, कोलकाता वंदेमातरम् गीत नहीं था, बिगुल था वह आज़ादी का।शंखनाद था विप्लव का वह, ...
धर्म की परछाईं – अधर्म (15th Edition)
धर्म की परछाईं - अधर्म अमित मिश्रा, सरायकेला हर तरफ राजनीति की कसावट है,यहां नीति तो बस दिखावट है,गर्दन पर ...
ज्ञान की दीपशिखा (15th Edition)
ज्ञान की दीपशिखा डॉ रामानुज पाठक, सतना ज्ञान की दीपशिखा जब मन में उजास भरती है,तो जिज्ञासा की नन्ही चिंगारी ...
हे प्रिय !बस थोडा पढ लेना ! (15th Edition)
हे प्रिय !बस थोडा पढ लेना ! प्रो. उदय प्रताप सिंह, कानपुर जब पलकें बोझिल हो जायेंअश्रु न जब धीरज ...
माँ का मन (15th Edition)
माँ का मन - ममता त्रिपाठी, कानपुरआज मेरा बेटा एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर आसीन है।ओजस्वी वाणी ...
नवजीवन (15th Edition)
नवजीवन - चंदा प्रहलादका, कोलकातायुगों अजेय गर्वित सभी जन।व्यक्तित्व दिव्य हुंकार अमन।है दीप्त भाल शुभ भाव नेक।रवि सम स्वरूप किरणें ...
पहचान का प्रश्नन (15th Edition)
पहचान का प्रश्नन सीमा त्रिवेदी साज़, नवी मुंबई पहलगाम हमले की पहली बरसी पर मन और विचारों को छूती रचना ...
भूलभुलैया है यह सारी दुनिया (15th Edition)
भूलभुलैया है यह सारी दुनिया डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी, गया हम जो देख रहे हैं वह सच है, या कोई सपना ...
नेता का जनता गान (व्यंग्य) (14th Edition)
नेता का जनता गान (व्यंग्य) अशोक अंजुम, अलीगढ़ हमको रास नहीं आता है, तेरा रास रचाना जनताहम गाते हैं जय-जय ...
बुढ़ापे से मुलाकात (व्यंग) (14th Edition)
बुढ़ापे से मुलाकात (व्यंग) डॉ. गिरिधर राय, कोलकाता सुबह-सुबह किसी नेदरवाजा खटखटाया।धीरे से मैं बुदबुदाया—इतनी सुबह-सुबह कौन आया?माँ ने कहा, ...
स्वीकार हो (14th Edition)
स्वीकार हो डॉ. दुर्गेश कुमार शुक्ल, प्रयागराज मैं शब्दों का सीमित स्वरूप;अर्थों का पूर्ण विस्तार हो तुम।मैं प्रणय कुंज का ...
धरा और मेघ (14th Edition)
धरा और मेघ व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी (राजस्थान) तुमने बरस कर मुझ परबहुत उपकार किया हैमेरी धूल धूसरित काया परहरित ...
