बेटी

पल्लवी अवस्थी, मसकट, ओमान

बेटियाँ हर घर का उजियारा,
माँ-पिता के दिल का सहारा,
हर रिश्ते में भर्ती प्यार,
इनसे ही महके ये पूरा संसार ।

ऊँचे सपनों की भरो उड़ान,
ना छोड़ो पर कभी संस्कारों का साथ,
सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती जाओ,
विनम्रता को अपना हथियार बनाओ ।

सच की राह पर चलना सीखो,
ईमान को अपना गहना बनाओ,
हर मुश्किलों से लड़ती जाओ,
शांत चित्त रख सदा मुस्कुराओ ।

अन्याय पर कभी चुप ना रहना,
माना शांति है एक सुंदर गहना,
पर सही के लिए आवाज़ उठाना,
यही है सच्ची रह पर चलना ।

मुस्कान से अपना संसार सजाओ,
औरों के जीवन में भी खुशियाँ लाओ,
पर इतना भी खुद को ना मिटाओ,
कि अपने ही सपनों को पीछे छोड़ती जाओ ।

सम्मान करो हर रिश्ते का,
माँ-बाप का मान बढ़ाओ,
उनकी सीख और आशीष को,
अपने जीवन का सार बनाओ ।

तुम नर्म भी हो, मज़बूत भी हो,
ये कभी ना भूल जाओ,
दिल में दया, आँखों में हिम्मत,
और आत्मसम्मान है तुम्हारी सबसे बड़ी ताक़त ।

खुशनसीब वो आँगन होगा,
जहाँ ऐसी बेटियों का वास होगा,
माता पिता की शान हो,
पूरे देश की पहचान हो ।

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