नव वर्ष सीमा त्रिवेदी ‘साज’, नवी मुंबई जाम हाथ में, शोर हवा में, आतिश की बौछार है। पूछ ज़रा उस भूखे से क्या, उसको लगे त्यौहार है? शुभकामना के संदेश से, इनबॉक्स भर जाता है। सड़क किनारे ठिठुर रहा जो, वह क्या इक घर पाता है? गाज़ा की जलती मिट्टी पर, मानवता जब मरती है। ‘वीटो’ के तानाशाही में, कूटनीति तब पलती है। ...
हिंदी कविता
जनसेवक भैया जी अशोक ‘अंजुम’ संपादक अभिनव प्रयास (त्रैमासिक), अलीगढ़ जब से जनसेवा का...
देश हमारा नहीं झुकेगा डॉ आशुतोष त्रिपाठी, रायपुर समझौते के चौराहे पर,कब तक अपना...
नफरत का बोझ विक्रम सिंह, बर्धवान नफरत, एक भारी शब्द है,कंधों पर नहीं ढोया...
ईश्वर एक दिव्य शक्ति राहुल चनानी, नवी मुंबई तुम विघ्नहर्ता.. तुम संकटमोचन..तुम हो तो...
ये दुनिया केवल सपना है डॉ. उदय प्रताप सिंह, कानपुर आओ बांटें चलो प्यार...
इनशब्दों ने व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी इन शब्दों ने कितने हीदुःखियों के मन को...
बंदर देखें दर्पण में… व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी बंदर जब जब देखे चेहरा दर्पण...
कोई गीत सुना दो डॉ. प्रमोद कुश ‘तन्हा’ (मुम्बई) अब रात घनी है, नींदों...
साइकिल बम/ बम ब्लास्ट…(व्यंग) गिरिधर राय, कोलकाता एक दिन मैंने एक आतंकी से पूछाभइया...
