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पुरुषार्थ (11th Edition) – janmaitri

पुरुषार्थ

नारी के सम्मान में है.!​
 

अपने पुरुषार्थ को स्तापिथ करने का ?
ये कैसा व्यवहार है ?
दबा ना सके जो नारी की वाणी..
क्या इसका हल दुराचार है ?

कुकर्मी इसको अधिकार ना समझे !
दुष्कर्म को अपना हथियार ना समझे !
भूले ना नारी में बसती माँ दुर्गा..
गलती से भी उन्हें लाचार ना समझे !

नर और नारी का हो समतल स्तर..
ना नारी है अबला और ना नर बेहतर..
एक धागा तो दूजा मोती है..
दोनों घातक है दोनों है नश्वर !

बराबरी का केवल नारा नहीं,
समानाधिकार देना होगा !
हम अपने घर ये अमल करेंगे..
प्रण आज हमें ये लेना होगा !

परस्पर आदर समाज बदलेगा..
इसके परिपालन से जुर्म घटेगा..
नर जो कर ले नारी की इज़्ज़त..
हर पीड़िता को न्याय मिलेगा !

मौन रहना और अन्याय को सहना
हमें बनाता है इसका प्रतिभागी..
सही दिशा जो मिले युवा को, वो..
बन जाएँगे इस क्रांति में सहभागी !

बेमानी शोर इक दिन शांत हो जाएँगे..
ये खोखले भाषण हमें सिर्फ़ भड़कायेंगे..
पर हमारे बदलाव का ये प्रयास ही हमें..
एक और अन्याय से भविष्य में बचाएंगे..

राहुल  चनानी, मुंबई

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