निदेशक की कलम से

चुनावी सरगर्मियों के शांत होते ही एक बार फिर देश के गलियारों में कुछ अनचाहे शब्दों की सुगबुगाहट तेज हो गई
है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों और जनता से की गई अपीलों ने एक बार फिर उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब देश ने कोरोना जैसी आपदा का सामना किया था। परन्तु, यह महज एक सुझाव नहीं, बल्कि एक गहरे आर्थिक संकेत की ओर इशारा करती है। पश्चिम एशिया (West Asia) के मौजूदा संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच, सरकार देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए कुछ “कड़े और बड़े” कदम उठाने की तैयारी में दिख रही है। नेपथ्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रहित में ‘आर्थिक संयम’ का एक नया मंत्र दिया और कहा कि
“जिस तरह हमने कोरोना संकट को मिलकर हराया, उसी तरह मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिए हमें कुछ त्याग करने होंगे।” मोदी जी की अपील के प्रमुख बिंदु:
1. सोने की खरीद पर अल्प विराम – जिससे भारत में सोने के आयात से विदेशी मुद्रा भंडार (FER) पर पड़ने वाले बोझ को रोका जा सके।
2. ईंधन की बचत – पेट्रोल, डीजल और गैस के न्यूनतम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन की प्राथमिकता ताकि ईंधन के संकट से बचा जा सके।
3. विदेशी यात्रा टालें – अनावश्यक विदेशी यात्रा से बचें ताकि देश की मुद्रा देश में ही रहे और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपए को बल मिल सके।
4. वर्क फ्रॉम होम (WFH) – कंपनियों और कर्मचारियों को WFH का सुझाव ताकि यातायात में खपत होने वाले ईंधन को कम किया जा सके।
मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखें तो सरकार द्वारा ये बड़े कदम उठाने के पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं –
1. विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव – वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात बिल रिकॉर्ड $72 बिलियन तक पहुँच गया है। रूस-यूक्रेन और अब पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
2. रुपये की गिरावट – डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में स्थिरता लाने के लिए सरकार को ‘इंपोर्ट बिल’ कम करना अनिवार्य हो गया है।
3. आर्थिक राष्ट्रवाद – पीएम मोदी देश को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में जनता को सीधे तौर पर भागीदार बनाना चाहते हैं, ताकि वैश्विक मंदी का असर भारत पर न्यूनतम हो।
प्रधानमंत्री की अपील अक्सर किसी बड़े नीतिगत बदलाव की ओर इशारा करती है और आश्चर्य न होगा यदि आने वाले समय में जनता को बड़े कदम के साथ कड़े नियम भी देखने को मिलें जैसे :
1. स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) – घरों में रखे सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार की नई और आकर्षक योजनाएं।
2. आयात शुल्क (Import Duty) में वृद्धि – सोने के आयात को कम करने के लिए ड्यूटी को बढ़ाना (हाल ही में इसमें कुछ वृद्धि हो चुकी है)।
3. डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड – भौतिक सोने (Physical Gold) के बजाय निवेश के डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देना।
4. ऊर्जा बचत के कड़े नियम – सरकारी और निजी कार्यालयों के लिए ऊर्जा खपत और वर्क फ्रॉम होम से जुड़े नए दिशानिर्देश।
प्रधानमंत्री की इस अपील, जोकि पूर्व-सावधानी (Precaution) के तौर पर की गई है को नजरअंदाज करना बेमानी होगा। अतः स्वतःसंज्ञान ले परिस्थितियों का मूल्यांकन करें एवं बिना किसी डर के सतर्क रहने का प्रयास करें। ऐसा करने से भारत न केवल अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचा पाएगा, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के बीच एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनकर भी उभरेगा। पीएम मोदी के अनुसार “देशवासियों ने युद्ध के समय हमेशा जिम्मेदारी निभाई है,” और वर्तमान वैश्विक आर्थिक हालात किसी युद्ध से कम नहीं हैं।
हमारा अनुशासन ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
