नवजीवन
– चंदा प्रहलादका, कोलकाता
युगों अजेय गर्वित सभी जन।
व्यक्तित्व दिव्य हुंकार अमन।
है दीप्त भाल शुभ भाव नेक।
रवि सम स्वरूप किरणें अनेक।
ओजस्वी वाणी बन मिसाल।
सौहार्द भाव अंतस विशाल।
पग-पग संघर्ष अतुल विवाद।
मैत्री प्रमुदित मृदुल संवाद।
हित वचन वृहत संबल प्रदान।
संचित सुधियाँ प्राण सम्मान।
स्पंदित जीवन करुण विराग।
देश-भक्ति अक्षय अनुराग।
सिद्ध संत है सोच जीवंत।
भाव मृदुल असंख्य अलंकृत।
क्षमता नेतृत्व सशक्त अमित।
हृदय चेतना साध अचंभित।
कर्म योग में रमे निरंतर।
शंख नाद जब हुआ अंतर।
अथक करे पुरुषार्थ अनवरत।
विषम साधना में विशेष रत।
सभी लौट पल-पल ये आये।
गीत सुहाने अधर सजाये।
ख़्वाब सभी पूरे हो मंजुल।
स्वर्णिम पावन दिन अंबर तल।
बंगाल गा उठा है सुगीत।
यही धर्म सनातन की जीत।
लोकतंत्र हो गया जीवंत।
शुभ भाव सुमंगल है अनंत।
बढ़ गया देश का आज मान।
सर्व भाव मिल गया सम्मान।
रख राम राज्य की नींव विशद।
हो तिमिर दूर नव भोर सुखद।
योगी मोदी जी शाह सशक्त।
संयम औ, धीरज बिषम सख्त।
सत नेक भाव मिल गई विजय।
विकसित हो राज्य सभी अजेय।
कायम बंगाल नव आयाम।
साथ, विश्वास का है सुनाम।
ये राजनीति का दौर नहीं।
सत कर्म मर्म की भोर यही।
ये धरा देश की ईश धाम।
कण-कण में गूंजे राम नाम।
जो, दिव्य स्वरूप शत उन्हें नमन।
पाया बंगाल ने नवजीवन।
