मरीचिका अगस्त की उमस भरी दोपहर थी। हवा में बरसात की नमी थी, पर...
लंबी कहानी
मातृ देवो भव माँ के पायल बिछुए की रुनझुन ब्राह्म मुहूर्त में पावन स्वर...
बाबुल की देहरी घर में प्रवेश करते ही नजर आलमारी पर जा रुकी- शर्बत...
मुस्कुराहट अहिल्या बाई किले में घूमते घूमते एक आवाज कानों में पड़ी, “सर, एक...
बहू बिना घर सूना हल्की-हल्की बूंदाबांदी से सर्दी का आभास होने लगा था। नवंबर...
शिवशक्ति हाथों में बच्चे के आते ही दो बूंद आँसू डॉक्टर शिवा के गालों...
तुम कैसी माँ हो घड़ी ने 4:00 बजाये ! संजना जी चौंक कर उठ...
अलविदा उसने मुड़ कर देखा — नीलेश बड़ी खामोशी से गाड़ी चला रहे थे।...
बहुत यादआती है बहू रानी श्याम की जिंदगी में संघर्ष ही संघर्ष था। बेटों...
वो नाश्ता ‘फिर से सूखी रोटी और आलू की सब्जी। पिछले तीन महीने से...
