मीत डॉ. दुर्गेश कुमार शुक्ल, प्रयागराज कुछ प्रसंग जीवन में आये, बन कर याद...
हिंदी कविता
किंकर्तव्यविमूढ़ता जीवन का आपाधापी से, कितना गहरा नाता है।
हिंदी कविता योग सदा किया करो सुबह-सुबह तुम उठा करो, आलस कभी न किया...
हिंदी कविता कर्मयोगी करवटों में नींद ढूंढे, उलझनों में हौसले। भीड़ में पहचान खोजे,...
