सीमा त्रिवेदी

नव वर्ष सीमा त्रिवेदी ‘साज’, नवी मुंबई जाम हाथ में, शोर हवा में, आतिश की बौछार है।   पूछ ज़रा उस भूखे से क्या, उसको लगे त्यौहार है?  शुभकामना के संदेश से, इनबॉक्स भर जाता है।  सड़क किनारे ठिठुर रहा जो, वह क्या इक घर पाता है?    गाज़ा की जलती मिट्टी पर, मानवता जब मरती है।  ‘वीटो’ के तानाशाही में, कूटनीति तब पलती है। ...