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वाह जिंदगी (10th Edition) – janmaitri

वाह जिंदगी

सी ए विनोद अग्रवाल कोलकाता

खुशहाल जीवन का सरल राज कल नहीं आनंदित जियो आज

मेरे एक मित्र ने अपनी बीवी की अलमारी से एक सुनहरे कलर का पैकेट निकाल कर उसमें रखी बेहद खूबसूरत सिल्क की साड़ी और उसके साथ की ज्वेलरी को एकटक देखा और कहा यह हमने 8-9 साल पहले लिया था, जब हम पहली बार लंदन गए थे। परन्तु, उसने ये कभी पहनी नहीं क्योंकि वह इसे किसी खास मौके पर पहनना चाहती थी और इसलिए इसे बचा कर रखा था। उसने उस पैकेट को भी दूसरे और कपड़ों के साथ अपनी बीवी की अर्थी के पास रख दिया।

उसने रोते हुए मेरी ओर देखा और कहा– किसी भी खास मौके के लिए कभी भी कुछ भी बचा के मत रखना, जिंदगी का हर एक दिन खास मौका है, कल का कुछ भरोसा नहीं है। उसकी उन बातों ने मेरी जिंदगी बदल दी। अब मैं किसी बात की ज्यादा चिंता नहीं करता। अब मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताता हूँ और काम का कम टेंशन लेता हूँ। मुझे अब समझ में आ चुका है कि जिंदगी जिंदादिली से जीने का नाम है।

डर-डर के, रुक-रुक के बहुत ज्यादा विचार करके चलने में समय आगे निकल जाता है और हम पिछड़ जाते हैं। अब मैं  कुछ भी बहुत संभाल के नहीं रखता, हर एक चीज़ का बिंदास और भरपूर उपयोग जी भर के करता हूँ। अब मैं घर के शो केस में रखी महँगी क्रॉकरी का हर दिन उपयोग करता हूँ…।

अगर मुझे पास के मार्केट में या नज़दीकी माॅल में मूवी देखने नए कपड़े पहन के जाने का मन है, तो जाता हूँ। अपने कीमती खास परफ्यूम को विशेष मौकों के लिए संभाल कर बचा के नहीं रखता, मैं उन्हें जब मर्जी आए तब उपयोग करता हूँ। ‘एक दिन ”किसी दिन” कोई ख़ास मौका’ जैसे शब्द अब मेरी डिक्शनरी से गुम होते जा रहे हैं..। अगर कुछ देखने, सुनने या करने लायक है, तो मुझे उसे अभी देखना सुनना या करना होता है। अगर मुझे पता चले कि मेरा अंतिम समय आ गया है तो क्या मैं इतनी छोटी-छोटी चीजों को भी नहीं कर पाने के लिए अफसोस करूँगा।

नहीं…!

हर दिन, हर घंटा, हर मिनट, हर पल विशेष है, खास है… बहुत खास है।

आदरणीय पाठक गण,

जिंदगी का लुत्फ उठाइए, आज में जिंदगी बसर कीजिये। क्या पता कल हो न हो। वैसे भी कहते हैं न कि कल तो कभी आता ही नहीं।

जिंदगी का कालजयी सत्य यही तो है :

आगाह अपनी मौत से, कोई बसर नहीं है। सामान सौ बरस का, पल की खबर नहीं है।। 

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