नेता का जनता गान (व्यंग्य) अशोक अंजुम, अलीगढ़ हमको रास नहीं आता है, तेरा रास रचाना जनता हम गाते हैं जय-जय कुर्सी, तू जन-गण-मन गाना जनता पस्त रहे तू मस्त रहें हम, घोटालों में व्यस्त रहें हम तुझे लाख हों रोग हमें क्या, चरें देश को स्वस्थ रहें हम तू तो केवल आँख बन्द कर, हमें वोट दे जाना जनता तुझको रोना है तू रो ले, जितना सोना है तू सो ले ...
