एकांतवास

मीनू त्रिपाठी,
नोएडा

पहाड़ों से घिरा वह स्थान सुधीर को बहुत अच्छा लगा। कई दिनों से वह ऐसे ही एकांत स्थान में आना चाहता था।

कुछ दिनों पहले ही उसने ‘पर्यटक’ नाम के घुमक्कड़ी ग्रुप में एक पोस्ट डाली- “शहर की आपा धापी से दूर शांत स्थान बताएं जहां सिर्फ प्रकृति, मैं और एकांत हो। भीड़ न हों, पर्यटक न हो। जहां मैं खुद को प्रकृति की गोद में सौंप दूं।”

एकांतवास के लिए पर्यटक ग्रुप के उसके मित्रों ने एक से बढ़कर एक स्थान सुझाए गए जिसमें से एक उसने चुन लिया और चला आया अकेला…

नीले आकाश तले दूर-दूर तक फैली पहाड़ों की चोटियों को ताकते हुए उसने गहरी सांस ली। मन ही मन संकल्प लिया कि यहां वह तीन दिन खुद को डिटॉक्स करेगा। सारे तनाव और अनवरत आते- विचारों को खुद से दूर रखेगा।

प्रकृति के सान्निध्य के इन खूबसूरत पलों को वह अपने कैमरे में कैद कर लेना चाहता था। नदी के किनारे, पेड़ों के बीच, पहाड़ों को ताकते हुए अनगिनत तस्वीरें खिंचवा कर जब वह थक गया तो आराम करने अपने कमरे में आ गया।

कुछ देर तक वह एकांत के स्वर को सुनता रहा। सुनते -सुनते जब थक गया तो हाथ स्मार्टफोन की ओर बढ़ गया।

पिक्चर्स गैलरी में जाकर कुछ तस्वीरें खंगाली फिर कुछ तस्वीरें चुनकर बढ़िया सी पोस्ट लिखी जिसमें इस दिव्य स्थान के बारे में और यहां की शांति और इसमें सदा के लिए रम जाने की इच्छा और यहां आने की सार्थकता जाहिर की।

पोस्ट लंबी थी, तस्वीरें अनगिनत थी। जल्दी ही तस्वीरों पर लाइक कमेंट आने लगे थे। एकांत अब गायब था। आभासी दुनिया में वह खुद को खो रहा था…अब उसके और प्रकृति के बीच भारी भीड़ थी और वह खुद को भीड़ के सुपुर्द कर रहा था।

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