वंदे मातरम् क्रांति-गाथा
डॉ. गिरिधर राय, कोलकाता
वंदेमातरम् गीत नहीं था, बिगुल था वह आज़ादी का।
शंखनाद था विप्लव का वह, अंग्रेजों की बर्बादी का।। 1
वंदेमातरम् गीत से ही भारत ने ली अंगड़ाई थी,
जिसके कंधे पर चढ़कर हमने आज़ादी पाई थी।। 2
‘गॉड सेव द क्वीन’ मुखालिफ, ‘वंदे मातरम्’ रच डाला,
ऋषि बंकिम ने राष्ट्र-शक्ति का, क्रांति-बीज ही बो डाला। 3
सात नवंबर अठारह सौ, पचहत्तर की वह बेला,
ऋषि बंकिम ने रचा गीत जो, बना क्रांति का इक रेला। 4
अठारह सौ छियानवे में, जोश नया लहराया था,
कलकत्ता अधिवेशन में कवि-गुरु ने इसको गाया था। 5
‘वंदे मातरम्’ ‘वंदे मातरम्’, गीत नहीं अब ज्वाला था,
‘लाला’ जी ने इसी नाम से, इक अखबार निकाला था। 6
‘गुड मॉर्निंग’ तज बच्चों ने जब, वंदे मातरम् बोला था,
पाँच रुपैया का दण्ड लगा, वह दण्ड नहीं इक शोला था। 7
वह अर्थदण्ड भी मिलकर के, दमोहि जन ने भर डाला,
बच्चों को झुकने नहीं दिया, अरि-मुख काला कर डाला। 8
कोड़े पड़ते रहे पीठ पर, ‘वंदे मातरम्’ ना छोड़ा,
पंद्रह वर्षीय सुशील सेन, ने ब्रितानी गुरुर तोड़ा। 9
इन्हीं रक्त के कतरों से तब, ‘खुदी-चाकि’ को जन्म लिया,
सुप्त पड़ी थी हिन्द-आत्मा, उसे जागरण मंत्र दिया। 10
वंदे मातरम् अंकित पावन, ध्वज ‘कामा’ ने फहराया,
सात समुंदर पार जर्मनी, में जाकर वह लहराया। 11
नेताजी ने सिंगापुर में, गीत यही दुहराया था,
आजाद हिंद की नींव पड़ी, वंदेमातरम् गाया था। 12
तुष्टिकरण की क्रूर चाल ने, पद इसके कुछ काट दिए,
डेढ़ सदी पर राष्ट्रवाद ने, सारे पद फिर साट लिए। 13
विकसित भारत के सपनों की, अब पावन पूजा होगी,
सुजला-सुफला भारत माता, स्वर्ग-सदृश सम अब होगी। 14
