धर्म की परछाईं - अधर्म
अमित मिश्रा, सरायकेला
हर तरफ राजनीति की कसावट है,
यहां नीति तो बस दिखावट है,
गर्दन पर जुआ है या पांव,
हर सीने में छुपा हुआ है घाव,
शराफत और जौहर बन गए हैं जहर,
हर कार्यक्षेत्र में आफत या अदावत है,
जनता का धरना नेताओं की दावत है,
गोश्त है भूखी नंगी आवाम का,
सत गुण चर्या दान धर्म है नाम का,
सांसों में गरल बहे, फिर कैसे साधु सरल रहे,
इसीलिए अब चारों तरफ बगावत है,
क्योंकि धर्म अभी भी अधर्मियो से आहत है।
