जो होता है अच्छा ही होता है

कोलकाता
रिसड़ा, कोलकाता से 30 किलोमीटर दूर स्थित बिड़ला समूह के एक कारखाने में कार्यरत एक आदमी बड़ी मेहनत से एक-एक रूपया जोड़ कर बांगुर पार्क से पांच किलोमीटर दूर, छोटा सा मकान बनवाता है। उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले १५ वर्षों से एक-एक पैसा बचत करता है, ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुख से रह सके।
आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है। तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही बिजली की तकनीकी गड़बड़ी से लगी आग में उसका मकान पूरी तरह नष्ट हो जाता है।
यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दुखी होता है, पर अपने आप को संतुलित कर मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है, जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके मकान जलने पर अफसोस जाहिर करने लगे। ओह ! बेचारे के साथ बहुत ही बुरा हुआ…
कितनी मुश्किल से एक – एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था….
इसी प्रकार की चर्चा लोग आपस में कर रहे थे।

वह आदमी वहाँ पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बाँटने लगता है। यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं। तभी उसका एक मित्र उससे कहता है, कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो, घर जल गया, तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो।
वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है, – तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है। ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही जल गया वरना तुम्हीं सोचो अगर यह दुर्घटना दो तीन दिन बाद होती तो, मैं मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकते थे, तब कितना बड़ा नुकसान होता।
हर व्यक्ति सुबह उठकर प्लान करता है कि आज मैं वहाँ जाऊंगा, आज 4 बजे उससे मिलूंगा जबकि अगले पल का भरोसा नहीं।
सुबह उठकर मन मे सोचिए कि _”श्री हरि इच्छा, देखे आज ईश्वर,क्या करवाता है, कैसा दिन गुजरवाता है”
आदरणीय पाठकों
महानायक अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति में एक बार कहा था –
मैंने जो चाहा वो हो जाता है, तो मैं प्रसन्न तथा मस्त रहता हूं, यदि मेरा चाहा हुआ नहीं हो तो ईश्वर का चाहा हुआ ऐसा सोचकर और प्रसन्न हो जाता हूँ।
मैं भी यही मानता हूं, कि जो मेरे पास है वो सबसे बढ़िया है, जो नहीं है वो मेरे लिए बढ़िया नहीं रहा होगा इसलिए ईश्वर ने नही होने दिया!
सारांश यहीं है – जो प्राप्त है वही पर्याप्त है
