ताली पीटना-बजाना जरूरी है,जीवन में..?

लोग ताली बजाने को अच्छा नहीं मानते हैं किंतु ताली पीटना, बजाना बेहद जरूरी क्रिया है। ताली पीटने वाले एक वर्ग को न नर में न मादा में माना जाता है, इन्हें बीच का माना गया है जिसे असम्मान से हिकारत से किन्नर कहते है। लेकिन किन्नरों में भी उनके कारनामों के कारण कई पुरुषार्थी होते हैं और कई मर्दो में भी उनकी आदतों की वजह से किन्नर पाए जाते हैं? दबाब बिंदु संधारण हेतु ताली बजाते हैं, जिससे शरीर टनाटन, आदमी भनाभन, मर्द सनन रहे ? शरीर में खून व ऑक्सीजन सतत धाराप्रवाह बहती रहे तो भय्या ताली पीटते रहें, इससे कई बीमारियां बोम नहीं मारती हैं।
बुजुर्गों का क्लीयर फंडा है कि भजन गायन में ताली बजाना सुपाचक, कव्वाली में क्रॉस ताली पीटना उत्तेजक,अच्छी कविता पाठ में ये उत्साह वर्धक,आराधना में मदमस्त होने पर ये आनंद दायक होती हैं। प्रसन्नता पर लगातार ताली बजाई जाती है। खुशी के मौके पर ताली एवं दुख में सिर पीटा जाता है। कुछ लोगों की शरारती धारणा है कि बैठे-बैठे क्या करें, शुरू करो अंताक्षरी ले कर प्रभु का नाम! ठीक उसी प्रकार बइठे-बैठे क्या करें, ताली पीटो, रोगों का नाश मिटो। कई प्रकार से ताली बजाई जाती है, मसलन ग्रिप, क्रॉस ताली इसे किन्नर बजाते हैं जिससे उत्तेजना बढ़ती है, दुनिया चलाने के लिए ये बेहद जरूरी है। इससे सम्पूर्ण शरीर सक्रिय होता है। ताली, रोग भगाने की कारगर चाबी है। कुछ चुनिंदा तालिबाजों ने ताली पीट कर बताया कि उल्टे हाथ पर सीधे हाथ से ताली बजाने से लीवर, कब्ज, एसिडिटी, मूत्र रोग, पित्ताशय के रोग भागते हैं। रक्तचाप सामान्य रहता है। थप्पी ताली बजाने से अनिंद्रा, स्लिप डिस्क, आंख रोग दूर होते हैं। किसी भी तालिबाज को हथेली लाल होने तक ताली बजाना, एक्यूप्रेशर सिद्धान्त के कारण फायदेमंद साबित होता है। स्वस्थ्य, तंदुरुस्त, टनाटन रहने हेतु ताली बजाना अनिवार्यता है। बुजुर्ग ऐसा मानते हैं। कहते हैं हर घटना के पीछे दोनो पहलू होते है तभी कहावत है कि ताली दोई हाथ से बजती है। दुनिया में कई लोगों को केला खाते फांस गड़ती है उन्हें ताली पीटना भी निरर्थक लगता है? जबकि जीवन में ताली बजाना भी खुशी, तंदुरुस्ती, आनंद के लिए नितांत आवश्यक है। अगर बजाते रहोगे ताली, तो चेहरे पर आएगी लाली, क्या जीजा, क्या साली, बजाते रहो सतत ताली, महफ़िल चाहे गोरी हो या काली, भरी हो या खाली, आयोजनों में पीटते रहो ताली, हुरियारे इसके साथ भांग चढ़ा बकते है गाली, नशेड़ी खूब बजाते ताली? भजनों में अलमस्त हो लोग बजाते ताली, बताते अपने वाली? नुकसान दायक नहीं है ताली, चाहे राजा हो या बगीचे का माली, खुशियों की पीटते रहो ताली, इस बात पर दे ताली? ताली, लय-ताल में बजें तो ईश्वर आनंद की अनुभूति देती हैं। किसी फूहड़ गाने पर पीटे तो अश्लीलता उपजती है।सद्कर्म पर उत्साहवर्धन स्वरूप प्रसन्नता देती हैं। मेरे तो गिरधर गोपाल, दूजा न कोई रे..में ताली गोपाल से मिलाती है। वीरचक्र मिलने पर तालियां देर तक बजती, गूंजती है। अध्यात्म में तालियां किसी हजार एमजी के कैप्सूल से अधिक कारगर है। मंच पर चढ़ते कलाकार की हौंसला अफजाई की तालियां उसका आत्मविश्वास चरम पर पहुंचा देती है। बचपन में सत्संग में जितनी ताली बजाते थे उतना ज्यादा प्रसाद मिलता था।नाम तालिबानी है किंतु उन्हें न ताली से कोई मतलब है न ही वाणी से? मानस पाठ में ताली बजाने से हम श्रीराम के करीब होते हैं। कई किन्नर ताली पीट पीटकर पैसा कमाते हैं। कई मर्द पैसों के खातिर किन्नर बन जाते हैं ?
