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जानते जा (11th Edition) – janmaitri

जानते जा

- अमित मिश्रा, सरायकेला

पाप आंसू से ही धुलेंगे
गंगा के जल से नहीं
कर्म जब भी खुलेंगे
धर्म से ही तुलेंगे
किसी अन्य वहम से नहीं
पुण्य ही तेरा होगा सवाली
उत्तर सारे होंगे खाली
मन तेरा रहा जहाली
अर्थ ज्ञान लगते गाली
चाहे धर्म सभा में
बैठ खुलेगा नहीं गेट
घर पर रखवा चाहे सत्य-नारायण या
गरुड़ पुराण पुण्य परायण
पुण्य से रहेगा तू वंचित
कर रखे पाप तूने संचित
आगे नरक में इसको काट
है स्वर्ग समान धरम की नाक
बिल्कुल पुण्य धर्म रक्षित
स्वर्ग को आते मरकर शिक्षित…..

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