क्रूज ट्रिप

अशोक शंकर त्रिपाठी

बहुत दिनों से मेरी समुद्र प्रवास एवं भ्रमण की इच्छा थी। मुझे कॉर्डेलिया क्रूज (Cordelia Cruises) के विषय में पता चला जिनके समुद्री जहाज यात्रियों को मुंबई, गोवा एवं लक्षद्वीप तथा अन्य स्थानों का भ्रमण कराते हैं। चूंकि मेरा निवास स्थान मुंबई में है अतः यह यात्रा मेरे लिए अन्य यात्रियों (जिनका निवास स्थान मुंबई के बाहर है) की अपेक्षा अधिक सुगम है। इस भ्रमण के लिए मैंने अपनी श्रीमती जी से बात की तो हमेशा की तरह उन्होंने इस यात्रा के प्रति कोई रुचि नहीं दिखाई। अतः मैंने अपने मित्रों एवं कुटुंब जनों से इस विषय में चर्चा प्रारंभ की और अंततः पटना निवासी चौबे जी (मेरे समधी जी) को इस यात्रा के लिए मना लिया। उन लोगों की सहमति के पश्चात मेरी श्रीमती जी भी इस यात्रा के लिए तैयार हो गईं। अब इस यात्रा की बुकिंग के लिए मैंने कॉर्डेलिया क्रूज से सीधा संपर्क किया और 15 से 20 दिसम्बर (5 रात / 6 दिन) की बुकिंग अगस्त माह में कर ली तदनुसार चौबे जी ने भी अपने परिवार (उनकी श्रीमती जी तथा पुत्र राहुल आनंद) की बुकिंग कर ली। प्रारम्भ में 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान करना पड़ता है और बाकी बकाया राशि का भुगतान यात्रा की तिथि से 60 दिन पहले करना पड़ता है, इसके लिए कॉर्डेलिया की ओर से यथा समय सूचना आती है। यदि किसी कारण वश यात्रा स्थगित या निरस्त करनी पड़े तो उसका रिफन्ड उनकी पॉलिसी के तहत होता है।

इस जहाज का विवरण निम्नवत है:

कॉर्डेलिया क्रूज़ जिसे पहले नॉर्वेजियन स्काई के नाम से जाना जाता था, एक 77,104 जीटी (सकल टन भार) जहाज है:

• लंबाई 258 मीटर

• 1,002 केबिन

• 2004 यात्रियों की अतिथि क्षमता

• 16 लाइफबोट और 74 लाइफ राफ्ट विश्व स्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं

• सुगम नौकायन के लिए डिज़ाइन किए गए डीजल-इलेक्ट्रिक इंजन द्वारा संचालित आलीशान केबिन

कॉर्डेलिया एम्प्रेस (हमारे जहाज का नाम) प्रत्येक यात्री के लिए केबिन श्रेणियों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है:

• निजी बालकनियों के साथ 829 वर्ग फुट तक का चेयरमैन सुइट

• 581 वर्ग फुट तक के सूट। निजी बालकनी के साथ विशाल आवास।

• 215 वर्गफुट तक के मिनी सुइट्स। निजी बालकनी के साथ, आराम और शैली का सही संतुलन,

• 140 वर्ग फुट का केबिन (जोकि मेरा केबिन था) महासागर के दृश्य सहित। बड़ी खिड़कियों के साथ, उन परिवारों और जोड़ों के लिए बढ़िया है जो समुद्र के दृश्य पसंद करते हैं

• 140 वर्ग फुट तक के आंतरिक केबिन आराम से समझौता किए बिना एक आरामदायक और किफायती विकल्प

प्रत्येक केबिन को आधुनिक सजावट, आराम और कार्यक्षमता के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि समुद्र के किनारे घर जैसा अनुभव हो।

डेक और जहाज पर स्थान :

कॉर्डेलिया कई डेक पर अपने कई विकल्प देता है, प्रत्येक डेक अनुभवों से भरा होता है:

• मार्की थिएटर: 930 मेहमानों तक के लिए भव्य शो और मनोरंजन का स्थान

• खुदरा और लाउंज: बुटीक, कॉफी शॉप और स्टाइलिश लाउंज

• पूल और आउटडोर कैफे: कॉकटेल के साथ धूप का आनंद लेने के लिए बिल्कुल सही स्थान

• बैठक कक्ष & पुस्तकालय – निजी कार्यक्रमों, व्यावसायिक समूहों, या सिर्फ शांत पढ़ने के लिए आदर्श

हर डेक में कुछ अनोखा होता है, जो यात्रा को एक तैरते शहर के अनुभव में बदल देता है।

डाइनिंग और बार :

भोजन कॉर्डेलिया अनुभव के लिए केंद्रीय है, और कॉर्डेलिया एम्प्रेस इसे एक पायदान ऊपर ले जाता हैः

• निःशुल्क रेस्तरां – पैलेस रेस्तरां और क्रॉसिंग, जो वैश्विक व्यंजन पेश करते हैं।

विशेष भोजन – भारतीय स्वाद के लिए मसाला मार्ग, कॉकटेल के लिए चेयरमैन क्लब, और एक उन्नत बार अनुभव के लिए कनेक्शन लाउंज

कैफे और ग्रिल – सुशी से लेकर आउटडोर ग्रिल तक, एकदम सही पारंपरिक भारतीय भोजन या अंतर्राष्ट्रीय व्यंजनों के लिए, कॉर्डेलिया क्रूज भोजन को एक अविस्मरणीय हिस्सा बनाता है। विशेष रूप से तैयार किए गए थीम वाले भोजन के अनुभवों का भी आनंद ले सकते हैं, जहाँ अद्वितीय मेनू और जीवंत सेटिंग हर भोजन को एक उत्सव में बदल देती है।

यात्रा की तिथि से लगभग 5-6 दिन पहले App के माध्यम से हवाई यात्रा की भांति वेब चेक इन करके बोर्डिंग पास डाउनलोड करना पड़ता है, इसके पहले इनकी वेबसाइट में डॉक्युमेंट्स (आइडी और एड्रेस प्रूफ – आधार) अपलोड करना होता है। बोर्डिंग पास की प्रति और आइडी प्रूफ की मूल प्रति अपने साथ रखने से क्रूज टर्मिनल में प्रवेष एवं सुरक्षा जांच में काफी आसानी होती है। बोर्डिंग पास में बोर्डिंग का समय दिया रहता है जिससे आप नियत समय पर बोर्डिंग टर्मिनल पहुँच जाएं।

यात्रा वृत्तान्त :

बोर्डिंग पास में दिए गए विवरण के अनुसार 15 दिसम्बर 2025 को हम लोगों को प्रातः 11:30 से 12 बजे के मध्य मुंबई के क्रूज टर्मिनल पहुँचने के लिए निर्देशित किया गया था। यथा समय हम लोग बॅलार्ड पिएर, फोर्ट, मुंबई पहुंचे। पूरा टर्मिनल एक सुरक्षित क्षेत्र में स्थित है जहां पर जन साधारण का प्रवेश निषिद्ध है, उसे देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे यह कोई सैन्य परिसर है। यह स्थान मुंबई रेलवे स्टेशन (CST) से विपरीत दिशा में कुछ दूरी पर स्थित है। वहाँ पहुँचकर देखा कि टर्मिनल भवन के प्रवेष द्वार के दोनों ओर लगभग 200 लोगों कि कतारें लगी हुईं थीं लोग अपने – अपने सामान के साथ कतार में खड़े हुए थे। सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए एक और एंट्री पॉइंट रखा था जो बोर्डिंग पास और आइडी प्रूफ देखकर ही लोगों को प्रवेष दे रहे थे। टर्मिनल भवन के अन्दर पहुँचकर सुखद अनुभूति हुई। बारह चेक इन काउन्टर कार्यरत थे जो लोगों के डॉक्युमेंट्स पुनः चेक करके प्रत्येक यात्री के नाम का केबिन कार्ड (एक प्लास्टिक कार्ड, जोकि देखने में एक क्रेडिट कार्ड की भांति प्रतीत होता है) यात्रियों को प्रदान कर रहे थे। उस कार्ड में यात्री का नाम और उसका केबिन नंबर इत्यादि अंकित रहता है और यही कार्ड केबिन की चाभी (cabin key) के लिए भी प्रयुक्त होता है। आगे की चेक इन प्रक्रिया इसी कार्ड से सम्पन्न होती है। अंतिम सुरक्षा जांच के पश्चात क्रूज के कर्मचारी केबिन कार्ड देखकर रैम्प में चढ़ने देते हैं, बैग लेकर यदि रैम्प पर चढ़ने में कठिनाई हो तो क्रूज कर्मियों कि सहायता ले सकते हैं। क्रूज के द्वार में प्रवेष करते ही हम लोगों का स्वागत तिलक लगाकर वेलकम पेय के साथ किया गया, फिर वहाँ से पेय पदार्थ पीने के पश्चात् सब लोग लिफ्ट से अपने डेक (floor) की ओर गए। हमारा केबिन डेक आठ पर था, अतः वहां से हमने अपने केबिन में प्रवेष किया। केबिन में प्रवेष करते ही अत्यन्त सुखद अनुभूति हुई। एक छोटा सा 140 वर्ग फिट का कॉम्पैक्ट केबिन जिसमें दो बेड नीचे + दो बेड (फोल्डेड) ऊपर + सामान रखने तथा कपड़े टांगने की अलमारी + छोटा सा बाथरूम + एक कुर्सी मेज इत्यादि है। साथ ही केबिन में एक टेलीफोन भी है जिसके द्वारा रिसेप्शन, एक केबिन से दूसरे केबिन में संपर्क कर सकते हैं। चूंकि हमने ओसन व्यू विंडो वाला केबिन बुक किया था अतः खिड़की से हमें समुद्र का सुन्दर एवम् साफ दृश्य दिखाई पड़ रहा था। क्रूज़ में आये हुए यात्रियों की अपार संख्या को देखकर समझ में आया कि आज के समय में न तो लोगों के पास पैसे की कमी है और न ही लोगों में भ्रमण की अभिलाषा की कमी। क्रूज़ स्टाफ से पूछने से पता चला कि उस दिन 1,600 यात्री के लिए आने वाले हैं|

केबिन में अपना सामान व्यवस्थित किया ही था कि तभी सार्वजनिक एनाउंसमेन्ट सिस्टम के माध्यम से उद्घोषणा हुई की डेक संख्या 6 से 9 के सभी यात्री मस्टर क्षेत्र डेक 6 पर अविलंब पहुंचे। वहाँ पहुँचने पर आपातकालीन स्थिति में लाइफ जैकेट का उपयोग कैसे करें, इस विषय में यात्रियों को सुरक्षा नियमों से अवगत कराने के लिए सुरक्षा अभ्यास का आयोजन किया गया था। तत्पश्चात हम लोग दोपहर का भोजन करने के लिए डेक 10 पर पहुंचे क्योंकि उस समय अपराह्न के 2 बज रहे थे। यह एक विशाल भोजन कक्ष था, कुर्सी मेजें लगी थीं जिसमें लगभग 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। सूप, सलाद, पापड़, 2-3 प्रकार की सब्जियां, दाल, चावल, रोटी, डेजर्ट, इत्यादि विविध प्रकार के व्यंजन उपलब्ध थे। समुद्र में सागर की ओर निहारते हुए पहली बार भोजन करने का अलग ही आनंद आ रहा था।

शाम को पाँच बजे डेक 10 पर पुनः पहुंचे जहाँ High tea की व्यवस्था इसी डेक पर उपलब्ध थी| उसके पश्चात लोग डेक पर ही समुद्र और उसके आस पास फैले सुंदर दृश्यों का आनंद लेने लगे। यद्यपि क्रूज निकासी का नियत समय 4:30 बजे शाम का था पर निरंतर यात्रियों के आगमन के कारण क्रूज शाम 7 बजे चला और मध्यम गति से जहाज गोवा की ओर बढ़ चला। शान्त समुद्र, उसमें धीमी गति से तैरता हुआ जहाज एक अद्भुत शान्ति प्रदान करता है। जीवन की आपा धापी से दूर एक तनाव मुक्त जीवन का आनन्द प्राप्त होता है।

प्रायः हर डेक पर एक सार्वजनिक एरिया है जहां पर जहाज के दोनों ओर 2 राउंड टेबल 4 सोफा चेयर के साथ + एक सोफा और सेटी + 2 अतिरिक्त सोफा कुर्सियां आराम करने के लिए रखी रहती हैं, जिससे कि लोग अपने ग्रुप के साथ वार्तालाप करते हुए यात्रा का आनंद लें। अपने केबिन में वापस पहुँचने पर हमने देखा कि वहाँ मेज पर एक विवरणिका “Cordelia टुडे” रखी हुई थी जिसमें जहाज में उस दिन होने वाली समस्त कार्यवाही, कब, कहाँ और क्या होने वाला है उसका पूर्ण विवरण दिया रहता है जिसके अनुसार आप अपनी अगली गतिविधि प्लान कर सकते हैं| क्रूज स्टाफ प्रतिदिन रात के समय केबिन में अगले दिन की विवरणिका देकर / डाल कर जाता है (यदि केबिन बंद है) जिससे आप तदनुसार अपनी अगले दिन की प्लानिंग कर सकें। क्रूज में ही यदि आप एक डेक से दूसरे डेक में (लिफ़्ट का उपयोग के बिना) ऊपर नीचे करें तो अच्छा खासा व्यायाम हो जाता है।

रात्रि के भोज के लिए हम लोग 9 बजे डेक 5 पर गए, यहाँ पर बहुत सुंदर लगभग 150 लोगों के बैठने का स्थान था। गद्देदार कुर्सियां, मेजें जिनमें सफेद चकाचक मेज़पोश लगे हुए। भोजन के लिए बुफ़े सिस्टम प्रत्येक स्थान पर था। डेक 5 पर केवल शाकाहारी भोजन ही उपलब्ध था, साथ में जैन भोजन के भी काउन्टर डिस्प्ले के साथ उपलब्ध था। मांसाहारी भोजन भी मिलता है, अतः डेक 4 पर भोजन के लिए हम लोग नहीं गए। भोजन में 2 प्रकार के सूप, विभिन्न प्रकार के सलाद, अंकुरित मूंग, पापड़, अचार, 2-3 प्रकार की सब्जियां, दाल (मूंग दाल, मसूर की दाल भी उपलब्ध थी), चावल, मूंग दाल खिचड़ी, कभी पास्ता, चाइनीज भोजन, इत्यादि विविध प्रकार के व्यंजन उपलब्ध रहते हैं। प्रति दिन अलग प्रकार की सब्जियां मिलती थीं। लौकी, तुरई, परवल, कटहल इत्यादि की सब्जियां भी उपलब्ध रहती थीं जोकि सामान्यतः किसी भी रेस्टोरेंट में नहीं मिलती। मिष्ठान में मूंग का हलवा, जलेबी, अखरोट / बादाम की बर्फी इत्यादि उपलब्ध था।

स्वल्पाहार (ब्रेकफ़ास्ट) के लिए भी कभी दलिया, ओट्स, विभिन्न प्रकार के कट फ्रूइट्स (sliced) केला, उपमा, पोहा, इडली सांभर, अलग – अलग प्रकार के वडा, आलू / चीज़ के पराठे, 2-3 प्रकार के कॉर्नफ्लेक्स, दूध, ब्रेड, मक्खन, टोस्टर जिसमें लोग ब्रेड रोस्ट करके खा सकें। पेस्ट्री, केक, कुकीज़ इत्यादि विविध प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध थे। प्रति दिन अलग – अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध रहते थे। वहां के सर्विंग स्टाफ, सदैव चुस्त, सुंदर पोशाक पहने मुस्कराते हुए स्वागत करते थे और अच्छी सेवा करते थे। भोजनोपरान्त मनोरंज के अन्य साधनों का आनन्द लेने के पश्चात् हम लोग अपने – अपने केबिन में सोने चले गए।

16/12 – सुबह सूर्योदय की लालिमा देखकर काफी अच्छा लगा। सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों का आनन्द लेने के लिए मैं सबसे ऊपर वाले डेक 11 पर पहुंचा। वहां पर उगते सूर्य की फोटोग्राफी करने के लिए पहले से ही काफी लोग एकत्रित थे। मैंने भी कुछ फोटो लिए। आधा घंटे बाद मैं पुनः नीचे अपने केबिन पर वापस आया। तब तक श्रीमती जी भी उठ चुकी थीं। स्नानादि से निवृत्त होकर हम लोग स्वल्पाहार के लिए डेक 5 पर पहुंचे। सब लोगों ने साथ मिलकर अपनी रुचि के अनुसार स्वल्पाहार किया। वहां के स्टाफ से बात करने उन्होंने बताया कि जहाज कल प्रातः 7 बजे गोवा पहुंचेगा। दिन भर विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर हमने अपना समय आनन्द पूर्वक बिताया। आज हमने Bridge Tour की बुकिंग की थी, जिसके लिए डेक 6 पर पहुंचने के लिए बुलाया गया, tour का समय अपरान्ह 2:30 बजे का था। इसके लिए लगभग 25 लोगों को लेकर क्रूज़ स्टाफ हमें नेविगेशन रुम में लेकर गया। वहां हमें बताया गया कि जहाज को चलाने में किन सावधानियों को ध्यान में रखना पड़ता है और जहाज का परिचालन कैसे होता है। 6 लोगों की नेविगेशन टीम थी, प्रत्येक व्यक्ति का क्या दायित्व है यह भी बताया गया। साथ ही यह भी बताया कि इस जहाज की अधिकतम गति 19.5 नॉटिकल माइल्स प्रति घंटा जोकि लगभग 35-36 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर है। उस समय जहाज की गति 12 नॉटिकल माइल्स प्रति घंटे थी। मुंबई से गोवा की दूरी (समुद्र के रास्ते) 566 किलोमीटर है। जहाज को 36 घंटे में गोवा पहुंचने का लक्ष्य था, सम्भवतः इसीलिए जहाज धीमी गति से चल रहा था। हमें यह भी बताया गया कि इस समय जहाज बीच समुद्र में चल रहा है और हमारे बाएं ओर सावंतवाडी (सिंधुदुर्ग जिला) है जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है।

17/12 को प्रातः 7 बजे जहाज गोवा पहुंचा। गोवा और लक्षद्वीप के भ्रमण के लिए हमने पहले से ही ऑनलाइन (अतिरिक्त पैसे देकर) बुकिंग कर रखी थी, अतः 6:45 पर हमें डेक 6 के कसीनो क्षेत्र में एकत्रित होने की सूचना पहले से ही दी गई थी। वहाँ से हम लोग जहाज के बाहर रैम्प के द्वारा मोरमू गोवा पोर्ट पर आए। यह भी एक प्रतिबंधित क्षेत्र है। यहाँ से हम लोग (26 लोगों का ग्रुप) बस द्वारा मँगेशी मन्दिर गए। रास्ते में गाइड ने हमें बताया कि हम लोग वास्को डि गामा क्षेत्र में हैं। मँगेशी मंदिर क्षेत्र मँगेशी गाँव, प्रियोल, पोंडा तालुक, गोवा में है। यह भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थ स्थल है, जो पारंपरिक गोवा और यूरोपीय शैलियों को मिलाने वाली अपनी सुंदर वास्तुकला, अपने ऐतिहासिक लैंप टॉवर और पोंडा क्षेत्र के अन्य मंदिरों से निकटता के लिए जाना जाता है। यह पणजी से लगभग 21 किमी दूर एक आध्यात्मिक केंद्र है। प्रातः वेला में मन्दिर के अन्दर भगवान के दिव्य दर्शन का हम लोगों ने आनन्द लिया। वहाँ से बस द्वारा ही हम लोगों ने मसालों के वृक्षारोपण उद्यान (spice plantation tour) के लिए प्रस्थान किया। गोवा में विभिन्न मसालों के बागान हैं, सबसे पुराने में से एक सवोई बागान, जहां हम भ्रमण के लिए गए| इसे दो शताब्दियों पहले विकसित किया गया था। सवोई वेरेम में स्थित, गोवा में यह मसाला बागान पूरी तरह से प्राकृतिक है और मसालों, फलों के साथ-साथ औषधीय पौधों को उगाता है। यहाँ के पेशेवर गाइड मसालों के पेड़, पौधों के पारंपरिक तरीकों के बारे में बहुत अच्छी तरह से बताते हैं| यह बागान बहुत ही प्राकृतिक और अच्छा दिखता है और यह गोवा के सबसे जैविक मसाला खेतों में से एक है। यहाँ हमारा स्वागत फूलों की पंखुड़ियों की बौछार और ताजे कोकम पेय (welcome drink) के साथ किया गया। उद्यान के भ्रमण के पश्चात हमें उद्यान के मसालों एवं वहीं के लोगों द्वारा बनाया गया स्वादिष्ट कोंकणी भोजन भी कराया गया। यह एक अत्यन्त आनन्द दायक भ्रमण था। वहाँ से लगभग तीन बजे हम जहाज पर वापस आए और हल्का भोजन किया।

शाम को हम लोगों ने Marquee थिएटर में “बल्ले – बल्ले डांस शो” देखा। यह एक अद्भुत नृत्य कार्यक्रम कहानी आधारित विषय पर था, जिसका हम लोगों ने भरपूर का आनंद लिया। इस कार्यक्रम में क्रूज स्टाफ ने ही प्रदर्शन किया था। महिलायें अधिकांशतः “चेयरमैन क्लब” में जाकर जीवंत संगीत एवं नृत्य का आनंद लेती थीं, जहां पर वहाँ के कलाकार कैरोके और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ अद्भुत संगीतमय गायन प्रस्तुत करते थे, एक – एक घंटे के अंतराल पर वहाँ निरंतर संगीत का कार्यक्रम चलता रहता था। शाम 4:30 बजे हमारा जहाज लक्षद्वीप के लिए प्रस्थान किया, अगले दिन लगभग 600 किलोमीटर की दूरी तय करके प्रातः 10:30 पर लक्षद्वीप पहुँचने का लक्ष्य था, अतः जहाज की गति तेज थी जो जहाज के किनारे से लहरों की ओर देखकर स्पष्ट समझ में आ रहा था।

18/12 को नियत समय पर प्रातः 10:30 पर हमारा जहाज लक्षद्वीप पहुंचा। जैसे – जैसे जहाज लक्षद्वीप के निकट पहुँच रहा था द्वीप का अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य हमें आकर्षित कर रहा था, द्वीप के किनारे का पानी हल्के हरे रंग का दिख रहा था, जबकि जहाज से समुद्र का पानी नीला दिख रहा था, इस मनमोहक छटा को हमने अपने मोबाईल कैमरे में सँजो लिया। हम लोगों ने यहाँ पर भी भ्रमण के लिए ऑनलाइन बुकिंग कर रखी थी। हमें भ्रमण की टिकट पहले ही दे दी गई थी और 10:15 पर कसीनो डेक 6 पर एकत्रित रहने का निर्देश दिया गया था, अपना स्वल्पाहार करके हम लोग नियत समय पर डेक 6 पर पहुँचें। यहाँ कोई बंदरगाह (पोर्ट) नहीं है। जहाज ने द्वीप के 2-3 किलोमीटर पहले ही अपना लंगर डाल दिया| वहाँ से जहाज में लटकी हुई नौकाओं (मोटर बोट) के द्वारा हमें 25 लोगों के ग्रुप में द्वीप की जेटी की ओर ले जाया गया। जहाज से उतर कर, छोटी नौका द्वारा अगाती द्वीप में जाना और वहाँ से वापस जहाज पर आना एक अत्यन्त रोमांचकारी अनुभव था। जेटी से कार में बैठकर हम लोग अगाती द्वीप पर गए। वहाँ पहुंचते ही हमारा स्वागत वेलकम ड्रिंक के साथ किया गया, जिसकी व्यवस्था कॉर्डेलिया कि टीम ने करके रखी थी। तत्पश्चात हमने पारंपरिक नृत्य एवं संगीत का आनंद लिया, महिलाओं ने भी नृत्य में भाग लिया। तत्पश्चात हम लोग समुद्र तट पर पानी के अन्दर गए सफेद रेत, पारदर्शी ठंडे पानी में खड़े रहकर थोड़ी देर तक जल क्रीड़ा की, तट के किनारे पर पड़ी हुई आरामदायक लंबी कुर्सियों में बैठकर इस प्राकृतिक सौन्दर्य का भरपूर आनंद लिया।

लक्षद्वीप एक अभूतपूर्व प्रवाल (coral) द्वीपों में से एक है, जो अपने नीले लगून, सफेद रेत और समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्ध है, और यह लक्षद्वीप का प्रवेश द्वार भी कहलाता है क्योंकि यहीं पर हवाई अड्डा है; यह स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग के लिए उत्तम है, जहाँ रंगीन मछलियाँ और मूंगे देखे जा सकते हैं। यह कोच्चि से लगभग 459 किमी दूर है और पर्यटकों के लिए एक शांत और प्राकृतिक स्वर्ग है। अरब सागर में स्थित, लक्षद्वीप / द्वीपसमूह प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, फ़िरोज़ा नीला पानी, प्रवाल भित्तियाँ (coral reefs), और शांत वातावरण के लिए अद्भुत स्थान है। लक्षद्वीप को नारियल द्वीप भी कहा जाता है क्योंकि इसके द्वीपों में नारियल के पेड़ों की व्यापक पैदावार है। ये पेड़ दैनिक जीवन के लिए आवश्यक हैं, स्थानीय व्यंजनों, आजीविका, पारंपरिक प्रथाओं और छोटे पैमाने के उद्योगों के लिए उपयोगी हैं, और इस द्वीप की संस्कृति तथा अर्थव्यवस्था का केंद्र हैं।

यदि आप शांत समुद्र तट, अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुभव करना चाहते हैं, समुद्री जीवन और प्रवाल भित्तियों (coral) को देखना चाहते हैं, शांत और एकांत वातावरण में आराम करना चाहते हैं तो लक्षद्वीप आपके लिए एक आदर्श स्थान है, जहाँ शांति और रोमांच का अनूठा मेल मिलता है। मछली पकड़ना (मत्स्य पालन) और नारियल उत्पाद यहाँ के मुख्य उद्योग हैं।

लगभग चार घंटे समुद्र तट पर बिता कर अपराह्न तीन बजे हम लोग जहाज पर वापस आए और सबसे पहले दोपहर का भोजन ग्रहण किया। थोड़ी देर अपने केबिन में विश्राम करने के बाद डेक 10 पर पीछे की ओर स्थित कृत्रिम सीधे पत्थर पर चढ़ाई (rock climbing) एक साहसिक कार्य का आनंद लिया। पहली बार में 25 फिट, और दूसरी बार में 15 फिट (first bell) लगभग 20 वर्ष बाद इस साहसिक कार्य को किया। इस बीच शाम 5 बजे हमारा जहाज लक्षद्वीप से मुंबई के लिए प्रस्थान किया। रात को अपने देश के प्रमुख जादूगरों में से एक तेजस के जादू का प्रदर्शन (magic show) देखा। तेजस (जिसे अधिकांशतः जादूगर तेजस या तेजस मालोडे के नाम से जानते हैं) मुंबई के एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित भारतीय जादूगर और मनोचिकित्सक हैं, जो आकर्षक प्रदर्शन, राष्ट्रीय जादू पुरस्कार जीतने और प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जो मन को झुकाने वाले भ्रम, मानसिकता पर ध्यान केंद्रित करते हैं, और अद्वितीय, अनुभवात्मक शो बनाते हैं, तथा आश्चर्य पैदा करने के लिए विज्ञान और मनोविज्ञान का मिश्रण करते हैं। सचमुच यह हमारा सौभाग्य था कि हमें तेजस के जादू का प्रत्यक्ष एक अद्भुत जीवंत शो देखने का अवसर मिला।

19/12 प्रातः उठकर डेक 11 पर गए और बीच समुद्र में सूर्योदय का अप्रतिम दृश्य देखा और इस प्राकृतिक दृश्य का भरपूर आनंद लिया। हमारा जहाज लगभग 36 किलोमीटर प्रति घंटे कि गति से मुंबई की ओर गतिमान था। आज हम लोगों ने डेक 10 पर स्थित तरण ताल में तैरने का प्रोग्राम बनाया था अतः स्वल्पाहार करने के पश्चात 10:30 बजे वहाँ पहुंचे और स्वीमिंग का भरपूर आनंद लिया। इस बीच पुणे से आए ग्रुप के किसी युगल की शादी की 25 वीं वर्षगांठ थी। कॉर्डेलिया की ओर से उस ग्रुप के लोगों के लिए विशिष्ट आयोजन किया गया था, ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी की शादी हो रही है। वहाँ उपस्थित जन समुदाय ने भी इसका आनंद उठाया, हमारे घर की महिलाएं भी उनके एक दो आयोजन में भाग लेकर उस उत्सव का हिस्सा बनीं। शाम को हम लोग कृत्रिम सीधे पत्थर पर चढ़ाई (rock climbing) के लिए डेक 10 पर पुनः गए। आज राहुल आनंद ने भी उत्साह दिखाया और दो बार 15 फिट (first bell) तक पहुँचने में सफलता प्राप्त की, उसने जीवन में पहली बार इस साहसिक कार्य को किया जोकि अत्यन्त प्रशंसनीय कार्य था। आज मैंने भी पुनः rock climbing की और पहली बार में ही 30 फिट (last bell) तक पहुँचकर घंटी बजाने में सफल हुए।

लक्षद्वीप से मुंबई कि दूरी समुद्र मार्ग से लगभग 1200-1300 किलोमीटर है, जिसे 35-36 घंटे में पूर्ण करके हमारे जहाज का लक्ष्य अगले दिन प्रातः 7 बजे तक मुंबई पहुंचने का था। अतः आज की रात के और प्रोग्राम संपादित करके हम लोगों ने चेक आउट के पूर्व अपने बकाया राशि (फोटोग्राफी और rock climbing से संबंधित) का भुगतान किया जिससे कि कल निकासी के समय कोई व्यवधान न हो। रात में ही हम लोगों के पास कॉर्डेलिया की ओर से किस डेक के यात्रियों को किस स्थान से निकासी करनी है इसकी सूचना आ गई थी।

20/12 प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर हम लोग डेक 5 पर स्वल्पाहार के लिए गए और अंतिम बार वहाँ पर सबने नियत समय पर अपना आहार ग्रहण किया। उस भोजन कक्ष के पर्यवेक्षक राजेश कुमार ठाकुर पटना निवासी के साथ चौबे जी का अच्छा परिचय हो गया था अतः उनके साथ ग्रुप फोटो ली गई। तत्पश्चात अपने कक्ष से अपना सामान लाकर हम लोग निकासी के लिए अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचे। चूंकि लगभग 2,000 यात्री जहाज में थे और सबकी निकासी एक ही द्वार से हो रही थी अतः समय लग रहा था। निकासी के समय कॉर्डेलिया के स्टाफ सबके केबिन कार्ड स्कैन कर रहे थे, जिनको कुछ बकाया भुगतान करना था उन्हें भुगतान करके चेक आउट करने को कह रहे थे। अंततः हम लोग 9:30 पर बाहर आए, हमारी गाड़ियां हमें लेने के लिए क्रूज टर्मिनल पर आ गईं और वहाँ से हम लोग इस अविस्मरणीय यात्रा का सकुशल समापन करके अपने घर पहुँचें। इस यात्रा के लिए प्रति व्यक्ति पचासी हजार की लागत आई जो इस सुखद यात्रा के अनुरूप है।

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