निदेशक की कलम से

अमित त्रिपाठी

भारत के विकासशील अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी : छोटे व्यापारी

भारतीय अर्थव्यवस्था की असली ताकत छोटे व्यापारियों यानी MSME (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) में बसती है। ये करोड़ों दुकानदार, कारखाने, रेहड़ी-पटरी वाले और स्टार्टअप्स देश की 30% जीडीपी जोड़ते हैं, 45% निर्यात का इंजन हैं और करोड़ों लोगों को रोजगार देते हैं। फरवरी 2026 में जब ट्रम्प टैरिफ्स से उबरते हुए भारत नए व्यापारिक सौदे कर रहा है, तब छोटे व्यापारी ही वो पहिया हैं जो अर्थव्यवस्था को गति देंगे। भारत जिस गति से वैश्विक व्यापार के नए क्षितिज पर कदम रख रहा है वह वास्तव में विश्व पटल पर बदलते समीकरण और भारतीय नेतृत्व के धैर्य और कूटनीति का नतीजा है। लम्बे समय से ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ दबाव के बावजूद अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौता ऐतिहासिक साबित हुआ है जहाँ 50% टैरिफ घटकर 18% रह गया, जिससे कपड़ा, आभूषण और IT निर्यात को बल मिला। साथ ही EU के साथ FTA से 92% टैरिफ लाइनें खुलीं, और इसी तरह ब्रिटेन, न्यूजीलैंड संग वार्ताएं तेज हैं।

ट्रम्प के टैरिफ में इजाफे से कपड़ा, आभूषण, रसायन जैसे क्षेत्रों में अमेरिका को निर्यात में 40% गिरने से छोटे व्यापारियों की कमर टूटने लगी। कोविड के बाद धीमी रिकवरी से कई छोटे कारोबार बंद हो चुके। परन्तु, अच्छी खबर यह है कि अमेरिका से टैरिफ घटकर 18% रह गया। EU, ब्रिटेन FTA से 92% बाजार खुलेंगे। निर्यात बढ़ेगा, छोटे व्यापारी कपड़े, हस्तशिल्प, इलेक्ट्रॉनिक्स बेच सकेंगे। ‘मेक इन इंडिया’, PLI स्कीम से भी निवेश में वृद्धि हुई है वहीं ई-कॉमर्स (Amazon, Flipkart) ने गांव तक बाजार पहुंचाया साथ ही UPI ने 50 करोड़ व्यापारियों को डिजिटल बनाया। सरकार की मुद्रा योजना से लाभान्वित जीडीपी के 6.5-7% बढ़ने की संभावना है।

सरकार ने ऑनलाइन GST पोर्टल सरल किया, ECLGS से सस्ता लोन दिया। स्टैंड-अप इंडिया ने महिलाओं, SC/ST को बढ़ावा दिया। परन्तु इसके अतिरिक्त आवश्यकता है — ब्याज सब्सिडी, सिंगल विंडो क्लियरेंस, निर्यात प्रोत्साहन इत्यादि की। यद्यपि बजट 2026 में आगे के विकासपथ को मजबूत करने का संकल्प तो दिखता है पर साथ ही सभी वायदों / नीतियों का अमलीकरण भी सुगम हो ऐसी व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करनी होगी।

छोटे व्यापारी ही भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बना सकते हैं – यदि लोन सस्ता, बाजार बड़ा, टेक्नोलॉजी आसान हो तभी ये चमत्कार हो सकते हैं। व्यापारी वर्ग में शायद ही कोई ऐसा हो जो अपनी स्थिरता या आगे बढ़ने की ललक को दबाना चाहता होगा पर, वो झुकता है तो बस सिस्टम से जुड़ी जटिलताओं के आगे या फिर उसके और सुगम सरकारी नीतियों के बीच आ रहे बिचौलियों की वजह से। वह जितना आत्मनिर्भर बनेगा उतनी ही सशक्त देश की आर्थिक नींव होगी। आत्मनिर्भर भारत का सपना इन्हीं के कंधों पर है – बस जरा सा सहारा मिल जाये, तो आसमान छूने की क्षमता रखते हैं। पर, यहाँ पर केवल सरकार की भागेदारी का इंतजार ना कर समर्थ / सक्षम व्यापारी वर्ग भी यदि अपना हाथ आगे बढ़ा दें तो भारत को विकासशील देश की राह से निकल कर विकसित भारत बनने से कोई नहीं रोक सकता है।

जय हिन्द ! जय भारत !

धन्यवाद
अमित त्रिपाठी

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