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निदेशक की कलम से (12th Edition) – janmaitri

निदेशक की कलम से

अमित त्रिपाठी

भूगोलीय राजनीतिक परिवर्तन और भारतीयता की मांग

79वें स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर, जब तिरंगा लहराते ही हमारे दिलों में देशभक्ति की लहर दौड़ जाती है, हम केवल अपने शहीदों के बलिदान को याद करने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने के लिए भी एकत्र होते हैं। आज़ादी के 79 वर्ष पूरे होने पर हमें यह सोचना होगा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल राजनीतिक आज़ादी नहीं, बल्कि आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी स्वावलंबन भी है।
 
दुनिया आज एक नए आर्थिक दौर से गुजर रही है। हाल ही में अमेरिका की ट्रंप टैरिफ नीति जो भारत के बढ़ते कद को देख ईर्ष्या से प्रेरित हो उठाया गया एक कदम लगता है, जैसी वैश्विक व्यापारिक चुनौतियाँ हमारे निर्यात, उद्योग और रोज़गार के अवसरों पर प्रभाव डाल सकती हैं। जब इस तरह की नीतियाँ हमारे उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाती हैं, तो यह सीधे-सीधे हमारे कारीगर, किसान, व्यापारी और उद्योगपति को प्रभावित करती हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि भारत ने हर कठिनाई को एक अवसर में बदला है – बशर्ते हम एकजुट रहें और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करें।
 
ट्रंप टैरिफ नीति वैसे तो पूरे विश्व के लिए आज एक परेशानी का सबब बनी हुई है, पर यदि हम भारत के दृष्टिकोण से देखें तो यह महज अपनी महत्वाकांक्षाओं की तुष्टिकरण से उत्प्रेरित हो उठाया हुआ कदम लगता है। ऐसे में यदि कोई अपने लिए नोबल पुरष्कार की चाहत रखता हो तो बड़ा बेमानी लगता है। खैर, भारत 140 करोड़ जनसमुदाय जिसमें युवाओं की संख्या किसी भी देश की तुलना में सर्वाधिक है, यदि एकत्रित हो इस परेशानी का सामना करे तो निश्चित तौर पर हम न सिर्फ अपने आपको सुरक्षित रख पाएंगे, बल्कि तटस्थ रहकर समयानुकूल यथोचित जवाब भी दे पाएंगे।
 
यह स्वतंत्रता दिवस हमें स्मरण कराता है कि जिस प्रकार हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने एकजुट होकर अंग्रेज़ी शासन को चुनौती दी थी, उसी प्रकार हमें भी आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक स्वर में आगे बढ़ना होगा, जो एक छोटे से बदलाव से ही संभव हो सकता है जैसे:
 
· स्थानीय उत्पादों को अपनाना – मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देना।
· नवाचार और तकनीकी उन्नति – युवा शक्ति को शोध, विज्ञान और तकनीकी में आगे बढ़ाना।
· ग्रामीण और शहरी भारत को जोड़ना – ताकि हर वर्ग आर्थिक विकास में सहभागी बने।
· और सर्वाधिक महत्वपूर्ण – एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना रखना।
 
आज, जब हम स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहे हैं, और देश बदलते हुए भूगोलीय राजनीतिक समीकरण से उपजी परेशानियों का पुरजोर सामना कर रहा है तो यह मात्र एक जश्न नहीं बल्कि एक संकल्प दिवस के रूप में भी मनाना चाहिए जहाँ हम अपने आपको यथासम्भव स्वदेशी बनाने के लिए तैयार कर सकें। हम एक ऐसे भारत का निर्माण करने का संकल्प लें जो आर्थिक रूप से मज़बूत, सामाजिक रूप से एकजुट और वैश्विक मंच पर आत्मसम्मान के साथ खड़ा हो सके।
 
आइए, हम सब एक स्वर में कहें –
“एक भारत, श्रेष्ठ भारत – वंदे मातरम् ! जय भारत ! जय हिन्द !”

सधन्यवाद
अमित त्रिपाठी

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