भौतिक समस्या और ज्योतिषीय समाधान

पं. राकेश जिज्ञासु, कानपुर

प्रश्न: मेरे विवाह को पांच वर्ष बीत चुके हैं ! एक बेटा है ! सासु मां और श्वसुर जी बहुत अच्छे हैं ! मेरा पूरा ख्याल रखते हैं। ख्याल पतिदेव भी रखते हैं किंतु उनका व्यवहार मेरे प्रति गैरों जैसा है। वे सोते भी अलग दूसरे कमरे में हैं। बातचीत जो भी करनी हो वो मम्मी पापा से करते हैं मुझसे किसी विषय में बात नहीं करते। मैं कुछ पूछूं तो उसका संक्षिप्त सा उत्तर दे देते हैं। स्वर में रूखापन स्पष्ट दिखता है। यह तिरस्कार मुझसे सहन नहीं होता। किसी से कुछ कह भी नहीं सकती ! कृपया मार्गदर्शन करें। क्या करूं जो इनका व्यवहार मेरे प्रति आत्मीय हो।

उत्तर: आपकी कुंडली धनु लग्न की है जिसमें लग्नेश चतुर्थेश गुरु भाग्येश सूर्य के साथ लग्न में ही बैठा है। किंतु सप्तमेश दशमेश बुध दुर्बल होकर द्वादश भाव में द्वितीयेश तृतीयेश शनि और केतु के साथ बैठा है। सप्तमेश का द्वादश में बैठना कई बार शैय्या सुख में बाधा उत्पन्न करता है। पति की आत्मीयता जीतने के लिए आपको निम्नलिखित प्रयास करने होंगे :

दाहिने हाथ की कनिष्ठिका में पन्ना रत्न की अंगूठी बुधवार के दिन धारण करें, दस किलो वजन पर एक रत्ती के हिसाब से !

‎नित्य श्रीगणपत्यत्वशीर्षं के तीन पाठ करें !

  1. ‎मां भगवती दुर्गा का ध्यान करते हुए “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखं, रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विशो जहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ” मंत्र की एक माला नित्य करें।
  2. ‎इक्यावन बुधवार व्रत का अनुष्ठान करें। जिसमें –

‎     1. वृद्धमूल की जड़ को उबाल कर उस जल से स्नान करें।

‎     2. स्नानोपरांत “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुद्धाय नम:” मंत्र से एक माला जाप करें।

‎     3. सूर्यास्त से एक घंटे बाद मूंग की दाल तथा घी से बने पदार्थ का भोजन करें।

‎     4. अनुष्ठान पूर्ण होने पर अपामार्ग की लकड़ी से हवन करें तथा पूर्णाहुति में मधु मोती और हरे वस्त्र का प्रयोग करें।

‎यदि आप ये सब श्रद्धापूर्वक कर सकीं तो मां भगवती अवश्य प्रसन्न होंगी और आप पर कृपा करेंगी।

‎ॐ स्वस्ति!

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