जिज्जी फिर आना

नवी मुंबई
अरे “जिज्जी” ! रामू की दुल्हन बोली। वो हंसकर कुछ बोल न पाई क्यों कि एक मील दूर कस्बे से यहां तक पैदल आते आते उसकी सांसे फूल गई थी। उम्र भी तो पैंतालिस पार कर चुकी थी। आंगन में चारपाई डाल दुल्हन अपने कमरे में चली गई। वहीं कमरा जो कभी अम्मा का कमरा था। अम्मा का कमरा यानि उन सब का कमरा, अब वह रामू और उसकी दुल्हन का कमरा था। अब पूरा घर ही उनका था जिसमें किसी का आना उन्हें कम ही पसंद था। इसीलिए मंजू नहीं आती थी — मंजू उसकी छोटी बहन।
पांच मिनट होने को आए दुल्हन तो कमरे से निकली ही नहीं तो उसने हैंडपंप चला कर चुल्लू में भर के खुद ही पानी पी लिया। खट पट की आवाज सुनकर दुल्हन बाहर निकली। थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें करके बोली – मैं इनसे कह रही थी कि एक साड़ी तो ले ही आओ, जीजी तो आएंगी ही। ऐसा लगा जैसे किसी ने ढेरों पानी उसके ऊपर उड़ेल दिया। उसकी बेटी ने मना किया था कि मत जाओ, मामी को अच्छा नहीं लगेगा पर वो पुराने दिनों के स्वप्न खटोले में उड़ रही थी। इतने में भतीजा उसके पांव छूने आया तो उसके पैर की ठोकर उसकी मां को लगी तो दुल्हन ने उसे ऐसे पीटा मानो कोई बड़ा गुनाह कर दिया हो। वो अजीब से अपराध बोध से भर उठी। दुल्हन अपने बेटे को खींचते हुए अपने कमरे में ले गई और वो जड़ सी उसी चारपाई में बैठी बैठी चौके की ओर टकटकी लगाए देखती रही। लगा चौके से अम्मा का बूढ़ा जर्जर शरीर उठा और उसे बाहों में भर लिया। वो चौंक उठी, आंसू आँखों से नीचे ढलकने को थे पर उसने संभाल लिया।
ये वही घर था जहां बाबूजी हमेशा बाजार जाने से पहले उससे ही पूछते थे “रनिया क्या सब्जी लाऊँ ” और वो जो बताती वही आता। उसने दलान की तरफ नजर डाली लगा बाबूजी की आवाज आएगी “रनिया आई है क्या” और उठ कर लाठी टेकते हुए उसकी ओर आएंगे। साइकिल की घंटी ने उसकी तंद्रा भंग की। उसने दरवाजे की तरफ देखा रामू एक बड़ा सा झोला लेकर आ रहा था, उसे देख दरवाजे पर ही रखकर हंसकर बोला “अरे जीजी”। पांव छूकर बोला “घर में सब कैसे हैं”।
रामू को देख कर चेहरे पर फैली प्रसन्नता को समेट कर वो बोली “सब ठीक है, रानू तो आने की बड़ी जिद कर रहा था लेकिन” कह कर वो रामू का चेहरा देखने लगी “अरे ठीक किया, बड़ी धूप है” !
तब तक दुल्हन झोला उठा कर अपने कमरे में ले गई थी। उसने राखी निकाली, मिठाई निकाली और रामू और भतीजे के हाथ में बांध लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया। रामू अंदर गया और एक साड़ी पर ग्यारह रु रख कर ले आया और दुल्हन चाय नाश्ता ले आई। उसने साड़ी परे हटाते हुए कहा ग्यारह रु लेते हुए कहा “मै यहां मायका महसूस करने आई थी। ये सब मुझे नहीं चाहिए” और अपना दो जोड़ी कपड़ों से भरा बैग उठा कर दरवाजे की तरफ बढ़ चली। पीछे से आवाज आई “जीजी फिर आना” …….. !
