भौतिक समस्या और ज्योतिषीय समाधान

पं. राकेश राज मिश्र जिज्ञासु, कानपुर

प्रश्न : मैं चालीस वर्षीय सामान्य गृहिणी हूं। मेरे विवाह को बारह वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। कहने को तो मेरे जीवन में सारे ही सुख साधन उपलब्ध हैं। अपना फ्लैट है, कार, ए सी किसी भी चीज़ का अभाव नहीं है। दो प्यारे प्यारे बच्चे हैं। सासु मां श्वसुर जी भरपूर स्नेह और सम्मान देते हैं। पर, पतिदेव की ओर से अंतरंगता का नितांत अभाव है और उसके बिना सारे सुख निरर्थक लगते हैं। वे अपनी कोई परेशानी मुझसे कभी नहीं कहते! गृहस्थी से संबंधित कोई बात परामर्श मुझसे नहीं करते!

उत्तर : आपकी कुंडली बहुत अच्छी है। आप भाग्य की बुलंद हैं। गृहसुख के साधन भी उपलब्ध हैं! पर दाम्पत्य सुख का अभाव है। ऐसा प्रायः कम होता है।

धनु लग्न में लग्नेश गुरु भाग्येश सूर्य के साथ बैठा है। पर सप्तमेश बुध द्वितीयेश तृतीयेश शनि और केतु के साथ द्वादश भाव में है और अष्टमेश चंद्रमा चौथे भाव में मित्र गुरु की मीन राशि में विद्यमान है। ऐसी कुंडली में दाम्पत्य सुख का प्रायः अभाव रहता है।

आप निम्नलिखित उपाय करें! परमात्मा चाहेगा तो अवश्य ही आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होगा :-

1- दाहिनेहाथ की छोटी उंगली में पन्ना रत्न की अंगूठी धारण करें एक रत्ती प्रति दस किलो वजन के हिसाब से!

2- नित्य श्रीसंकटनाशन गणेश स्तोत्र का एक पाठ और श्रीगणपत्यथर्वशीर्षम के तीन पाठ करें।

3- इक्यावन बुधवार तक विशेष व्रत अनुष्ठान करें। इस दिन वृद्धमूल की जड़ को पानी में उबाल कर उसे स्नान वाले जल में मिला कर स्नान करें। तथा “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नमः” का जाप करें। सूर्यास्त के उपरांत मूंग की दाल तथा घी से बने पदार्थ का सेवन करें।

4- व्रत पूर्ण होने पर अपामार्ग की लकड़ी से हवन करें! तथा पूर्णाहुति में मधु मोती तथा हरे वस्त्र का प्रयोग करें।

मां भगवती आपका कल्याण करे!

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