Warning: Undefined array key "valid" in /home/u532500264/domains/janmaitri.com/public_html/wp-content/plugins/otw-smart-post-lists/include/otw_components/otw_factory/otw_factory.class.php on line 85 बैसवारी मुहावरे – janmaitri
राम मिलायी जोड़ी, एक आँधर (अँधा) एक कोढ़ी अर्थात
आगे नाथ न पीछे पगहा अर्थात अर्थात
नौ दिन चले अढ़ाई कोस अर्थात
अर्थात
नाचि न आवै आंगन टेढ़ा अर्थात
अर्थात
बिलारी (बिल्ली) के भाग (भाग्य) ते छींका (सिकहर) टूटा अर्थात
अर्थात
आँख एक नहीं, कजरौटा दस दस अर्थात
अर्थात
छटाँक चून चौ बारे रसोई अर्थात
अर्थात
छूँछी हांडी बाजे टन टन अर्थात
अर्थात
खेत खाये गदहा मार खाये जुलहा अर्थात
अर्थात
कोयल होय न उजली सौ मन साबुन लाई अर्थात अर्थात
ऐसे लोग जो एक दूसरे की मदद न करें
जो व्यक्ति परिवार में अकेला हो
धीमी गति से चलना
काम न करने का बहाना
भाग्यवश कुछ अचानक मिल जाये
व्यर्थ आडम्बर
केवल दिखावा
हल्के व्यक्ति के खोखलेपन का खुलासा
निरपराधी को दण्डित करना
कितना भी प्रयत्न किया जाए स्वभाव नहीं बदलता