बेटा देर रात लौटा घर तो मां के छलके आंसू

टीनएज में बच्चे अपनी आजादी और फैसलों को ज्यादा अहमियत देने लगते हैं। वहीं, माता-पिता की चिंता उन्हें कई बार बेवजह की रोक-टोक लगती है। इसी वजह से के छोटी-छोटी बातें भी बड़े विवाद में बदल जाती हैं और बच्चे गुस्से में ऐसी बातें कह देते हैं, जसिसे रिश्तों में दूरियां बढ़ा जाती हैं। ऐसा ही एक उदाहरण पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा ने साझा किया। इसमें 15 साल का आर्यन देर तक घर नहीं लौटा। जब वह घर पहुंचा, तो घबराई मां ने सिर्फ इतना कहा, ‘कम से कम एक मैसेज ही कर देता।’ लेकिन बेटे का जवाब सुन उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस उदाहरण के जरिए एक्सपर्ट ने समझाया कि आखिर टीनएज में पेरेंट्स और बच्चों के बीच दूरियां क्यों बढ़ने लगती हैं और उन्हें समझदारी से कैसे संभाला जा सकता है। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा कहती हैं कि बचपन में माता-पिता और बच्चों के बीच गहरा प्यार होता है, लेकिन फिर 15 से 18 साल की उम्र आते-आते कई बच्चों और पेरेंट्स के बीच दूरियां क्यों बढ़ने लगती हैं? इसे समझाने के लिए वह एक उदाहरण देती हैं। वह बताती हैं, ‘रात के करीब 9 बजे थे। 15 साल का आर्यन अभी तक घर नहीं लौटा था। उसकी मां बार-बार घड़ी की ओर देख रही थीं। उन्होंने बेटे को एक-दो नहीं, बल्कि पांच बार फोन किया, लेकिन आर्यन ने एक भी कॉल का जवाब नहीं दिया।’ इसके कुछ देर बाद दरवाजा खुला और आर्यन घर आ गया। उसे देखते ही मां ने पूछा, ‘फोन क्यों नहीं उठाया?’ आर्यन ने बैग रखा और सहज अंदाज में कहा, ‘फ्रेंड्स के साथ था।’ यह सुनते ही मां की आवाज ऊंची हो गई। उन्होंने कहा, ‘तो क्या हुआ? क्या एक मैसेज करने की भी फुर्सत नहीं थी? एक मैसेज ही कर देते’, मां की बात सुनकर आर्यन भी चिढ़ गया और बोला, ‘क्या हर बात का जवाब देना जरूरी है?’
बस, यहीं से मां और बेटे में बहस शुरू हो गई। आर्यन ने गुस्से में अपने कमरे का दरवाजा जोर से बंद कर लिया। उधर, मां की आंखों में आंसू आ गए। वह सोचने लगीं, ‘मैं इससे इतना प्यार करती हूं, फिर भी आज यह मुझसे इस तरह बात करने लगा।’ वहीं, आर्यन के मन में यह भावना थी, ‘मम्मी को मुझ पर भरोसा ही नहीं है। उन्हें हमेशा यही लगता है कि मैं कुछ गलत ही करता हूं।’ एक्सपर्ट आगे कहती हैं कि इस उदाहरण से यह समझने की जरूरत है कि यहां न तो आर्यन गलत था और न ही उसकी मां। एक तरफ मां की चिंता थी, तो दूसरी तरफ आर्यन की आजादी की चाह। दोनों अपनी-अपनी जगह सही थे, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे की बात सुनने और समझने की कोशिश नहीं की। वह कहती हैं, अगर उस रात आर्यन की मां सिर्फ इतना कहतीं, ‘मैं बहुत डर गई थी, अगली बार बस एक मैसेज कर दिया करो,’ और आर्यन जवाब में कह देता, ‘सॉरी मम्मा, आपको मेरी वजह से बहुत चिंता हो गई होगी,’ तो शायद न कमरे का दरवाजा गुस्से में बंद होता और न ही घर का माहौल इतना खराब होता। पेरेंटिंग कोच अंत में कहती हैं कि याद रखिए, टीनएज में पेरेंट्स और बच्चों के बीच मतभेद इसलिए नहीं बढ़ते क्योंकि उनके बीच प्यार कम हो जाता है। बल्कि इसकी वजह यह होती है कि दोनों एक-दूसरे के डर, भावनाओं और जरूरतों को समझ नहीं पाते। वह आगे कहती हैं कि पेरेंट्स की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे तुरंत टोकने लगते हैं। उन्हें लगता है, ‘अगर अभी नहीं समझाया, तो बच्चे का व्यवहार बिगड़ जाएगा।’ जबकि सच यह है कि उस समय बच्चे के व्यवहार से ज्यादा उसके पीछे छिपी भावनाओं को समझने की जरूरत होती है। जब पेरेंट्स ऐसा करते हैं, तो बहस कम होती है और उनके व बच्चे के बीच का रिश्ता मजबूत बनता है।




