और चांदनी रात है
बद्री प्रसाद वर्मा अनजान गोरखपुर
रात है जवां जवां
और चांदनी रात है।
आज तो तुमसे मेरी
पहली मुलाकात है।
तुम कब आओगी
बस तेरा इंतजार है।
तुमसे मिलने को
दिल बेकरार है।
चांदनी बरस रही है
पुरवा बह रही बयार है ।
तेरे आने का हमें
बस इंतजार है।
तुमसे हुआ मेरा
पहला पहला प्यार है।
दो बात करने को
दिल बेकरार है।
तुम आ गई मिलने
आ गई बहार है।
सच कह रहा हूँ
तुमसे पहला पहला प्यार है।
भर लूं तुमको बाहों में
आज प्यार का त्यौहार है।
अब न किसी बात का
अब हमें परवाह है।




