आधुनिक पीढ़ियों का बदलता परिदृश्य : Millennials, Generation Z और Generation Alpha

डॉ. ज्योत्स्ना सिंह राजावत,
ग्वालियर

पीढ़ी का सामान्य अर्थ है एक समान ऐतिहासिक काल में जन्मे तथा समान सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों में विकसित हुए लोगों का समूह।

परंतु आधुनिक समाज में पीढ़ियों की पहचान केवल आयु से नहीं होती है, बल्कि तकनीकी अनुभव उनकी पहचान का महत्वपूर्ण आधार बन गया है।

एक पीढ़ी के बाद जब दूसरी पीढ़ी आती है तब उसके आने पर प्रायः लोग यही कहते हैं कि, अब समय बहुत बदल गया है, नई पीढ़ी में अब पहले जैसी बात नहीं है। सब बदल गया है, हमारे समय में जो था वह नये बच्चों में कहां ? अब त्याग ,अनुशासन, सहनशीलता सब चली गई है।

इस तरह की बातें हर दौर में पुरानी पीढ़ी द्वारा नई पीढ़ी के लिए कही जाती रही हैं। पुरानी पीढ़ी की सोच अनुभव से भरी हुई होती है जबकि नई पीढ़ी जोश और उत्साह से भरी हुई नवीन प्रयोगों के साथ बदलाव करना चाहती है।

अब यहां हम बात करते हैं प्रमुख तीन पीढ़ियों के बदलाव की। वर्तमान के इस दौर में इनकी चर्चा करना आवश्यक हो गया है। वर्तमान समाज की तीन प्रमुख पीढ़ियां—Millennials, Generation Z और Generation Alpha के बदलते स्वरूप और उनके सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव के आधार पर वर्तमान समय में इन तीनों पीढ़ियों के बीच का अंतर केवल उम्र का अंतर नहीं है, बल्कि यह सोच, जीवन-दृष्टि, तकनीकी समझ, शिक्षा, कार्य-संस्कृति और सामाजिक मूल्यों में आए व्यापक परिवर्तन का प्रतिबिंब है।

वास्तव में आज एक ही परिवार में ये तीनों पीढ़ियाँ साथ-साथ दिखाई देती हैं। Millennials ने तकनीक को आते हुए देखा और उसके साथ स्वयं को बदला, Generation Z ने तकनीक को अपने जीवन का स्वाभाविक हिस्सा माना, जबकि Generation Alpha का बचपन ही स्मार्टफोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल संसार के बीच विकसित हो रहा है।

आधुनिक तकनीकी संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परंपरा के आधार पर इन तीन पीढ़ियों का सफर आश्चर्यजनक अनुभवों से भरा हुआ है इनके जीवन में तकनीकी परिवर्तन की तीव्रता और जीवन पद्धति का बड़ा बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। सभी जानते हैं “परिवर्तन संसार का नियम है” प्रकृति निरंतर गतिशील है—ऋतुओं का परिवर्तन, दिन-रात्रि का क्रम, और वेदान्त दर्शन में स्थूल शरीर के परिवर्तन अस्ति, जायते, वर्धते, विपरिणमते, अपक्षीयते विनश्यति। षड्विकारवदेतत्स्थूलशरीरं। इसी क्रम में वनस्पतियों का विकास, नदियों का प्रवाह सब परिवर्तन की निरंतर प्रक्रिया हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में भी कहा गया है कि – सभी प्राणी अपनी प्रकृति के अनुसार व्यवहार करते हैं – “प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति।” (भगवद्गीता 3.33) सांख्य दर्शन कहता है यह परिवर्तन प्रकृति के बदलाव के साथ आता है या मनुष्यों में त्रिगुणात्मकता (सत्त्व, रजस् और तमस्) के भेद से परिवर्तन आता है। क्या इन तीनों गुणों की परस्पर क्रिया से प्रकृति में भी निरंतर परिवर्तन और विकास होता है। निसंदेह हां इसलिए प्रकृति मूलतः गतिशील है।

यहीं से हम तीनों आधुनिक पीढ़ियों के परिवर्तन को भी समझने की कोशिश कर सकते हैं।

Millennials –> Generation Z –> Generation Alpha — यह केवल नाम के आधार का परिवर्तन नहीं है, बल्कि समाज की बदलती प्रकृति, तकनीकी विकास और मानव जीवन-शैली के परिवर्तन की अभिव्यक्ति है। आज कलम से कंप्यूटर तक का सफर आश्चर्य उत्पन्न करता है। कंप्यूटर से स्मार्टफोन, स्मार्टफोन से AI तक सब बदलाव इसी दौर के हैं। यहां समय, तकनीक, आर्थिक परिस्थितियाँ, शिक्षा-पद्धति और सामाजिक संरचनाएँ सब धीरे – धीरे बदले और उनके साथ मनुष्य की सोच, व्यवहार तथा जीवन-मूल्यों पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।

वर्तमान समय में Millennials (Generation Y), Generation Z तथा Generation Alpha Millennials ने पारंपरिक और डिजिटल दोनों संस्कारों के संक्रमण का समय देखा है; Generation Z डिजिटल परिवेश में पली-बढ़ी है; जबकि Generation Alpha का जन्म ए आई, स्मार्ट उपकरण और सोशल मीडिया के मध्य हुआ। जहां घर परिवार के हर सदस्य की उँगलियाँ स्मार्टफोन पर थीं, गर्भस्थ शिशु के मूमेंट्स की रिकार्डिंग, स्नैपशॉट और जन्म के समय शेयरिंग सोशल साइट्स पर, परिवार के समूह में या मोबाइल की गैलरी में इसके साथ ही हाॅस्पिटल में मेडिकल स्टाफ और आने जाने वाले हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन था। यह भी प्रकृति और समाज की परिवर्तनशीलता का आधुनिक रूप है। सोशल मीडिया, मीम्स और शॉर्ट-फॉर्म मैसेजिंग ने संवाद को तेज और अधिक प्रभावी बना दिया है। पर आमने-सामने की बातचीत कम होकर डिजिटल संपर्क बहुत अधिक हो गया है।

प्रश्न यह है कि इस पीढ़ी में तकनीकी प्रगति के साथ – साथ उसके मानवीय, नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संस्कार किस दिशा में जा रहे हैं ? हमारी भारतीय संस्कृति तकनीकी दक्षता के साथ-साथ विद्या, विवेक, विनय, कर्तव्य, सह-अस्तित्व और सामाजिक सद्भाव की बात करती है। अतः आधुनिक पीढ़ियों का अध्ययन भारतीय परम्पराओं की दृष्टि देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि तकनीक बदल सकती है, माध्यम बदल सकते हैं, परंतु मनुष्य के समग्र विकास के लिए ज्ञान और संस्कार का संतुलन सदैव आवश्यक रहेगा। प्रत्येक पीढ़ी अपने पूर्ववर्ती समाज से कुछ प्राप्त करती है और उसमें कुछ नया जोड़ती है। इसी कारण समाज में परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।

भारतीय चिंतन में भी समय और परिवर्तन को स्वीकार किया गया है “चरैवेति चरैवेति।” अर्थात् गतिशीलता ही जीवन का आधार है। आज यह गतिशीलता अभूतपूर्व गति से दिखाई देती है। जिस परिवर्तन को पहले एक पीढ़ी अनुभव करती थी, वह परिवर्तन अब एक ही दशक में दिखाई देने लगा है। इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और अब Artificial Intelligence (AI) ने मनुष्य के सीखने, सोचने, संवाद करने और कार्य करने के तरीकों को बहुत प्रभावित किया है।

तीनों पीढ़ियां आधुनिक सभ्यता के तीन अलग-अलग चरणों का प्रतिनिधित्व करती हैं—

Millennials — तकनीकी परिवर्तन के साक्षी
Generation Z — डिजिटल संसार के सहभागी
Generation Alpha — कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीक के युग की पीढ़ी

इन तीन पीढ़ियों के बीच संवाद और समझ अत्यंत आवश्यक है। अनुभव, परंपरा ,परिवर्तन और भविष्य की संभावनाओं के साथ आने वाले कल को बेहतर बनाने का प्रयास करना होगा। अपनी जड़ों को मजबूत रखकर अनंत आकाश की ऊंचाइयों पर पहुंचने का प्रयास करना होगा। यह भविष्य की आदर्श पीढ़ी तब होगी जब तकनीक का सही समुचित उपयोग करें, तकनीक की गुलाम न बने – यही प्रयास करना होगा। विद्यालय और महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ गंभीरता से जोड़ना आवश्यक होगा। आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण पुस्तकों का अध्ययन विद्यार्थियों में गहन चिंतन, एकाग्रता, तार्किक क्षमता और विषय की मूलभूत समझ विकसित कराना आवश्यक हो गया है। अतः विद्यार्थियों को केवल डिजिटल सामग्री पर निर्भर न रखते हुए पुस्तक-पठन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करना होगा। वर्तमान पीढ़ी का आचरण, व्यवहार और उसके बदलते हुए खुले विचार निसंदेह अब चिंतन का विषय बन गए हैं। यह विषय केवल समाजशास्त्रीय विमर्श तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षाशास्त्र, मनोविज्ञान, संस्कृति तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ा हुआ एक व्यापक विमर्श बन चुका है।

आज की पीढ़ी की सोच, जीवन-शैली, नैतिक मूल्यों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तीव्र परिवर्तन दिखाई दे रहा है। इन परिवर्तनों को केवल ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ कहकर समझना पर्याप्त नहीं होगा। बल्कि इसके पीछे कारणों को भी जानना आवश्यक है। मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और तकनीकी कारकों के माध्यम से समझा जाए तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के आलोक में आधुनिकता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के मध्य संतुलन बना रहे।

अतः वर्तमान पीढ़ी का बदलता आचरण और दृष्टिकोण केवल चिंता का विषय नहीं, बल्कि उसे जानने, समझने, संवाद करने और सही दिशा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा।

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