योग सिर्फ आसन नहीं, दर्शन है

आपने अब तक अपने स्वास्थ्य पर काम करना शुरु नहीं किया ? बस इन्सटा पर रील देख रहे हैं ? क्या नया फॉलो करने के बारे में सोच रहे हैं ? मैंने योग जीवनशैली का पालन करने का संकल्प लिया है। जब मैंने पहली बार योग करने की सोची तो मेरा मकसद शरीर में लाचिलापन लाना था। ऑनलाइन वीडियो पर लोगो की फ्लेक्सिबिलिटी देखकर मैं काफी इंस्पायर होती थी और मुझे लगा कि यही योग है। जब मैंने आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के योग प्रमाणपत्र बोर्ड से संबद्धता प्राप्त संस्थान से प्रशिक्षण लेना शुरू किया, तो मैंने सीखा कि योग सिर्फ़ आसन और मुद्रा से कहीं ज़्यादा है; इसके इर्द-गिर्द एक पूरा दर्शन है।
मैंने हठयोगप्रदीपिका पढ़ी और जाना कि ‘योग दर्शन’ (Yoga philosophy) अध्ययन का एक जटिल क्षेत्र है, जिसमें नैतिक संहिताएँ और दिशा-निर्देश, जीवनशैली तकनीकें और ईश्वर से जुड़ने के तरीके शामिल हैं। मूल रूप से, यह आत्मा और परमात्मा के बीच परम संबंध प्राप्त करने के बारे में है। वास्तव में, ‘योग’ शब्द का अर्थ है जुड़ना या एकाकार होना। योग सत्र की शुरुआत और समापन हम प्रभु प्रार्थना से करते हैं।
पतंजलि के योग सूत्र, संस्कृत सूत्रों का एक प्राचीन संग्रह है, जिसे ऋषि पतंजलि ने लगभग 500 ईसा पूर्व लिखा था। पहले सूत्र का सबसे पहला शब्द ‘अथ’ है, जिसका अर्थ है ‘अभी’ (now)। इस शब्द को सावधानी से रखा गया है क्योंकि यह योग के उद्देश्य को संक्षेप में प्रस्तुत करता है, उपस्थित होना। यहाँ, अभी होना।
‘अथ योगनुशासनम्’ (अब, योग की शिक्षाएँ।) — योग सूत्र 1.1
अपने लेखन में, योग के जनक पतंजलि ने उल्लेख किया है कि सच्ची योगिक सफलता योग के आठ अंगों का पालन करने से आती है, जिन्हें योग के आठ स्तंभ भी कहा जाता है।
1. यम – अहिंसा, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा जैसे नैतिक नियम
2. नियम – आत्म-अनुशासन, जैसे तपस्या, पवित्रता, संतोष और आत्मनिरीक्षण
3. आसन – शारीरिक अभ्यास जैसे मुद्राएँ
4. प्राणायाम – साँस लेने की तकनीक
5. प्रत्याहार – इंद्रियों की निर्लिप्तता
6. धारणा – एकाग्रता
7. ध्यान – ध्यानपूर्ण चिंतन
8. समाधि – परम ज्ञान या ईश्वर के साथ एकता
क्या आपने देखा कि आसन सूची के आठ अंगों में से केवल एक हैं ? जी हाँ, आसन योग का एकमात्र केंद्र नहीं हैं। सभी 8 अंग योग दर्शन के साथ-साथ हमारे जीवन के सभी पहलुओं में योगदान करते हैं।
योग सीखने से मुझे अपने जीवन के दृष्टिकोण को बेहतर बनाने में मदद मिली है:
1) सेल्फ एक्सेप्टेंस – ऑनलाइन योग के रील्स देखने से योग नहीं होगा, ये वास्तव में अपने रोज की दिनचर्या में स्थान देना होगा। सोशल मीडिया पोस्ट्स की माइंडलेस स्क्रॉलिंग, ज्यादातर हमें खुद की तुलना दूसरों से करने को प्रेरित करती हैं, जो हमें आत्म-प्रेम से दूर ले जाती है। जबकि योग स्व को स्वीकारने में मदद करता है। नए योग आसन आजमाते समय मैंने अपनी शारीरिक फ्लैक्सिबिलिटी की लिमीटेसन को स्वीकार किया और अपने वर्तमान स्व को स्वीकार करना सीखा, ताकि खुद को बेहतर के लिए चुनौती दे सकूं। योग में सचेत रहने से किसी भी पास्ट ट्रॉमा के अप्रिय विचार भी सामने आ सकते हैं, और योग दर्शन हमें उन्हें स्वीकार करना और उन्हें जाने देना सिखाता है। आसन, प्राणायाम और आहार निर्देश का पालन मुझे नई ऊर्जा और खुशी हासिल करने में मदद करते हैं। इमोशनल ट्रॉमा को ठीक करने का एक शक्तिशाली तरीका योग मुद्राओं या आसनों के माध्यम से भी संभव है। योग हमें ईश्वर से जुड़ने के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण प्रदान करता है।
2) ग्रोथ माइंडसेट – योग में ध्यान और सांस लेने का समावेश हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। नियमित योग अभ्यास मानसिक स्पष्टता और शांति पैदा करता है; शरीर की जागरूकता बढ़ाता है; पुराने तनाव पैटर्न से राहत देता है; मन को शांत करता है; ध्यान केंद्रित करता है; और एकाग्रता को तेज करता है। खुद को स्वीकार करने के साथ, योग दर्शन हमें अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करना भी सिखाता है। स्ट्रेचिंग करने के दौरान मैंने समझा कि योग में, सब या कुछ भी नहीं – ऐसा नहीं है। बस आप कोशिश करते रहें। संशोधन करते रहें, सांस लेते रहें और भरोसा करें कि आप वह असंभव लगने वाला आसन भी एक दिन पूर्णतया कर ही लेंगे। योग के लाभ सुनिश्चित करने के लिए नियमत अभ्यास करना ज़रूरी है।
योग जीवन शैली को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए – नई शुरुआत करें:
1) क्लास ज्वाइन करें, अगर आपको आस-पास मदद नहीं मिल रही है या रोज़ घर से बाहर जाना मुश्किल है तो आप लाइफमंत्र की ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। लाइफमंत्र की 7 ए एम क्लब में हम रोज सुबह प्रार्थना, प्राणायाम और योगाभ्यास करते हैं।
2) सफलता के लिए निरंतरता ही कुंजी है। आप जितना नियमित रूप से योग करेंगे, यह उतना ही फायदेमंद होगा। बेशक, एक सत्र के बाद ही आपको फर्क महसूस होगा, लेकिन लगातार अभ्यास से समग्र लाभ मिलते हैं। भले ही यह सिर्फ़ 15 मिनट का प्राणायाम हो या 10 मिनट का ध्यान, इसे हर दिन करें, अधिमानतः एक ही समय पर ताकि यह एक आदत बन जाए।
3) अस्वस्थ ऊर्जाओं से छुटकारा पाने का एक स्वस्थ और प्रभावी तरीका ढूँढना एक बेहतरीन उपहार है ! डिटॉक्स करें, सिर्फ़ जंक फ़ूड से ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया से भी। नेगेटिव लोगों से ही नहीं नेगेटिव विचारों से भी।
4) अपरिग्रह ये बताता है की अष्टांग योग करने वालों को कुछ भी जरूरत से ज्यादा जमा नहीं करना चाहिए। अपरिग्रह का मतलब है कि आपके पास जो है, उससे संतुष्ट रहना और यह संभव है! मैं भौतिक सुख को त्यागने की बात नहीं कर रही। अपरिग्रह का अनुवाद अक्सर “गैर-लोभ”, “गैर-स्वामित्व” और “गैर-आसक्ति” के रूप में किया जाता है। “ग्रह” शब्द का अर्थ है लेना, पकड़ना या हड़पना। “परि” शब्द का अर्थ है “सभी तरफ़ से।” और उपसर्ग “अ” शब्द का नकारात्मक अर्थ है, जिसका अर्थ है “नहीं।” कुल मिलाकर, अपरिग्रह शब्द का अर्थ है ज़रूरत से ज़्यादा न लेना।
एक योग प्रशिक्षक के रूप में मैं यह कहूंगी कि योग अभ्यास और योग सिद्धांतों का पालन करना कठिन है, बट इटस् वर्थ इट! कभी-कभी योग के दौरान दर्द भी हो सकता है, लेकिन यह अभ्यास का हिस्सा है। यह एक अच्छा दर्द है जो अंततः शरीर, मन और आत्मा को बेहतर महसूस कराता है। कोई भी प्रयास व्यर्थ नहीं जाता। यह योग और जीवन दोनों का सच है। और योग आखिरकार एक अभ्यास ही तो है जिसका उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
