भौतिक समस्या और ज्योतिषीय समाधान

कानपुर
प्रश्न : मेरी बेटी ने इसी जनवरी में पंद्रह वर्ष पूरे किए हैं। पढ़ाई में होशियार थी किंतु इधर दो वर्षों से इसका व्यवहार कुछ उद्दंड सा हो गया है। हर समय मोबाइल में लगी रहती है। एक बार मोबाइल ले लिया गया तो इसने तूफान खड़ा कर दिया और बोली कि यदि वापस न दिया तो आत्महत्या कर लेगी। डर कर दे दिया गया।
अभी पिछले सप्ताह पड़ोस में शादी थी! सभी को जाना था पर वो बहाना कर के घर में ही रुक गई। मन में कुछ शंका थी इस कारण मैं बीच में ही घर आ गई तो उसे एक लड़के के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया। लड़का तो मुझे देखते ही भाग गया। पर उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी इस लड़की ने नहीं करने दी। लड़की का मामला है, बहुत परेशान हूं। कृपया मार्गदर्शन करें, हमें क्या करना चाहिए।
उत्तर : आपकी बेटी की कुंडली कन्या लग्न की है! लग्न में चंद्रमा और शनि विराजमान हैं। तीसरे घर में द्वितीयेश और भाग्येश शुक्र बैठा है। चौथे घर में नीच का राहु बुध के साथ बैठा है। उच्च का मंगल सूर्य के साथ पांचवें घर में और चतुर्थेश सप्तमेश गुरु सातवें घर में स्वराशि का है। अभी इसकी राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा आरंभ हुई है।
समस्या की जड़ शुक्र का मंगल की राशि में, शनि के नवांश में, शनि से दृष्ट होकर बैठना है। ऐसे जातक के मन मस्तिष्क में यौनाचार के प्रति रुझान सामान्य से अधिक होता है। सबसे पहले तो आप ये मान लें कि दोष आपकी बेटी का नहीं बल्कि उसके ग्रहों की स्थिति का है। इसकी शांति के लिए आप निम्नलिखित उपाय करें तो अवश्य लाभ होगा:-
१- बेटी की मध्यमा में दस किलो वजन पर तीन रत्ती के हिसाब से लाजवर्त की अंगूठी चांदी में बनवा कर पहनावें।
२- एक किलो आठ सौ ग्राम जौ उसके ऊपर से उतार कर दूध में धोकर बहते जल में प्रवाहित करें।
३- आप और आपकी बेटी दोनों बृहस्पतिवार का विशेष पूजन अनुष्ठान नियमित करें।
४- बेटी को रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखें! उसे अकेला न छोड़ें! उसके साथ स्नेहपूर्ण मित्रवत व्यवहार करें। ईश्वर पर भरोसा रखें और बेटी के प्रति शुभ चिंतन रखें। किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार मन में न आने दें।
प्रभु ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा! मां भगवती आपका कल्याण करें!
ॐ स्वस्ति!
