बाघों की भूमि, बॉंधवगढ़

अरविन्द त्रिपाठी

बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान को बाघों की भूमि कहा जाता है. इस क्षेत्र पर जहॉं पहले राजाओं का राज था, एक प्रसिद्ध शिकारगाह था और आज भी इसे वन्यजीवों की फोटो लेने के लिए संरक्षित रखा गया है. अगर आप पहले कभी भी भारत के किसी भी राष्ट्रीय अभयारण्य में नहीं गये हैं तो “ बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में “ बाघ सफारी “ का आनंद अवश्य लीजियेगा. निश्चित रूप से आप यहाँ के तीनों ज़ोन की सफारी कर प्रफुल्लित हो जाएँगे और जंगल को भी आत्मसात् व अनुभव कर पायेंगे.

लगभग एकांत में स्थित बॉंधवगढ़ में नर बाघों के लिए अपने घर की तलाश में निकलने के बहुत कम रास्ते हैं, इसलिए उपयुक्त आवास और शिकार के आधार के साथ साथ यहाँ बाघों की संख्या काफी अधिक है. अक्सर कहा जाता है कि यह दुनिया में बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए सबसे उपयुक्त जगह है.

बॉंधवगढ़ बाघ अभयारण्य 1100 वर्ग किमी में फैला हुआ जिसका मुख्य क्षेत्र 440 वर्ग किमी है. अनुभवी गाइडों और ड्राइवरों के साथ बॉंधवगढ़ में जंगल सफारी का ट्रिप एक रोमांचकारी अनुभव है. पुराने समय के बाघों द्वारा प्रयोग किये जाने वाले रास्ते आज भी उनकी संतानों द्वारा प्रयोग किये जाते हैं और स्थानीय लोगों के नजरिये से इन बाघों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

बॉंधवगढ़ का परिदृश्य साल और बांस के वृक्षों से भरा हुआ है, लेकिन इसकी असली सुंदरता “ ताला” ज़ोन में दिखाई देती है , जो अपने  घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है और लगभग पूरी तरह से विशाल पहाड़ियों से घिरा हुआ है. जिनपर 10 वीं शताब्दी के पुराने किले और मीनारें बनी हुई हैं.

बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान पक्षियों को देखने के लिये एक उत्कृष्ट स्थान है जहाँ पक्षियों को आसानी से देखा जा सकता है. यहाँ भारतीय गिद्ध,श्वेत पूंछ वाले गिद्ध जैसे गिद्धों की अच्छी ख़ासी संख्या है, जो चट्टानों पर बसेरा बनाते हैं. एशियाई फ्लाई कैचर, गोल्डन ओरियोल, इंडियन पिट्टा और साथ ही दुर्लभ व्हाइट कैप्ड बंटिग भी यहाँ देखने को मिलते हैं. बॉंधवगढ़ में विभिन्न प्रकार के जीवों की बहुलता के कारण इसकी शानदार समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र हर किसी के लिये अवसर प्रदान करता है _ छोटी छोटी तितलियों से लेकर राजसी बाघों तक.

बॉंधवगढ़ अभयारण्य ने बाघों के संरक्षण के लिये दुनिया भर में ख्याति अर्जित की है और यहाँ असामान्य रूप से उच्च घनत्व वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक सुखद आश्चर्य है. महत्वपूर्ण शिकार प्रजातियों में चीतल सांभर, भौंकने वाले हिरण, नीलगाय,चिंकारा, बायसन, जंगली सुअर,चौसिंगा, लंगूर और रीसस मकाक शामिल हैं. उन पर निर्भर बाघ,तेंदुआ, कुत्ता,भेड़िया और सियार जैसे प्रमुख शिकारी जीव हैं. इनके अलावा भालू,साही,भारतीय पैंगोलिन,चमगादड़ों की विभिन्न प्रकार की प्रजातियाँ हैं. पार्क में 250 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ मौजूद हैं.

अतीत में रीवा के महाराजाओं का शिकारगाह रहा बॉंधवगढ़, इसकी प्रसिद्ध सबसे मनमोहक बाघिन “ सीता “ और सबसे आक्रामक बाघ “ चार्जर “ के कारण हुआ है. प्रत्येक जंगली बाघ का जीवनकाल छोटा होता है, जिसके दौरान वह जंगल में अपना वर्चस्व बनाये रखता है , हालाँकि “ चार्जर “ कुछ अलग था. उसने असाधारण रूप से लंबा जीवन जिया और बॉंधवगढ़ में सत्ता हथियाने की कोशिश करने वाले हर नर बाघ को पराजित किया. काफी लम्बे जीवन के बाद अंततः उसकी उम्र ने उसका साथ छोड़ दिया. “ चार्जर “ और “ सीता “ ने कई बाघ बच्चों को जन्म दिया, जिसके कारण आज “ बॉंधवगढ़ “ देश के बाघ अभयारण्यों में संख्या के आधार पर लगातार सिरमौर बना हुआ है.

एक योजना के अंतर्गत बाघों को नाम के स्थान पर नम्बर से पहचान दी गई. दो बाघ “बी 1 “ और “बी 2” जो आपस में चचेरे भाई थे, ने “ चार्जर “ के बूढ़े होने पर उसके इलाक़े पर घात लगाने की कोशिश की और “ बी 2” इसमें सफल रहा. बाघ बी 2 ने अगले कुछ वर्षों तक राजा की तरह राज किया. वह भारतीय वन्यजीवों का प्रतीक बन गया और उसने भारत में वन्यजीव पर्यटन के लिए बॉंधवगढ़ को एक नया मुकाम दिया. “बीबीसी , डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफिक और यहॉं तक कि आइकॉन फिल्मस भी इन महान बाघों की कहानियाँ को प्रसारित करने से स्वयं को रोक नहीं पाये. उनके कहानियों के किस्से सफारी के गाइड, ड्राइवर और स्थानीय लोग बड़े चाव से सुनाते हैं.

बॉंधवगढ़ टाइगर रिजर्व को घूमने के लिये तीन ज़ोनों में बॉंटा गया है, ताला, मगधी और खितौली जोन. …

ताला जोन— बॉंधवगढ़ अभयारण्य में ताला जोन प्रमुख है. यहाँ पर पर्यटक आकर्षणों में शेष शैया पर लेटे विष्णु भगवान, चरण गंगा, बड़ी गुफा और शिकारगाह शामिल हैं.  अपने गाइड से इनके बारे में पूछना न भूलें. इसलिये यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत में टाइगर सफारी, बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के सभी आकर्षणों का अनुभव किये बिना अधूरी है.

मगधी और खितौली जोन— मगधी और खितौली जोन एक दूसरे के सामने स्थित, ये दोनों द्वार बाघों के दर्शन के लिये प्रसिद्ध हैं. इन्हें क्रमशः गेट नम्बर 2 और गेट नम्बर 3 के नाम से भी जाना जाता है. जबकि ताला जोन में अक्सर पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है. मगधी और खितौली जोन शांत वातावरण प्रदान करते हैं और जंगल के रोमांचकारी माहौल के साथ बॉंधवगढ़ का एक अलग ही रूप प्रस्तुत करते हैं.image

बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में सफारी के प्रकार— यदि आपने किसी राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा करने का निर्णय लिया है तो आप यह अच्छी तरह जानते हैं कि वन्यजीव सफारी टूर किये बिना आप वापस नहीं लौटेंगे. बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी भारत के सबसे प्रसिद्ध बाघ अभयारण्यों में से एक को देखने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है. जो अपने उच्च घनत्व और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है. यह टाइगर रिजर्व तीन मुख्य क्षेत्रों में विभाजित है, जिनमें से प्रत्येक अद्वितीय परिदृश्य और अनुभव प्रदान करता है. जीप सफारी पर्यटकों को जंगल के भीतर गहराई तक जाने और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाये रखते हुए अभयारण्य के विशाल क्षेत्रों को कुशलतापूर्वक कवर करने की सुविधा देती है. जीप सफारी की लचीलता और गतिशीलता एक अंतरंग, गहन और रोमांच भरा अनुभव प्रदान करती है जो इसे वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों दोनों के लिए पसंदीदा विकल्प बनाती है.

सुबह की सफारी— सुबह की सफारी भोर में शुरू होती है जिसमें तापमान ठंडा रहता है और जानवरों की गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं. यह वन्यजीवों को देखने का सबसे अच्छा समय होता है , क्योंकि वे शिकार करने या घूमने के लिए निकलते हैं. शांत वातावरण और सुबह की हल्की रोशनी फ़ोटोग्राफ़ी के लिए भी आदर्श परिस्थितियाँ बनाती हैं.

शाम की सफारी— शाम की सफारी दोपहर बाद शुरू होती है और सूर्यास्त के समय अभयारण्य का एक अलग ही नजारा पेश करती है. बाघों को देखने का यह एक और बेहतरीन समय है क्योंकि जानवर अक्सर सूर्यास्त से पहले फिर से सक्रिय हो जाते हैं. बदलती रोशनी आस-पास के वातावरण में एक जादुई आकर्षण जोड़ती है, जिससे पूरा अनुभव और भी बेहतर हो जाता है.

पूरे दिन की सफारी— वन्यजीवों का गहन अनुभव चाहने वालों के लिए पूरे दिन की सफारी सूर्योदय से सूर्यास्त तक कई क्षेत्रों को कवर करते हुए विशेष पहुंच प्रदान करती है. कम प्रतिबंधों और विस्तारित समय के साथ पूरे दिन की सफारी दुर्लभ जीवों को देखने की संभावना को बढ़ाती है और शानदार तस्वीरें लेने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है.

बॉंधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सफारी के लिए बुकिंग कैसे करें— इस खूबसूरत जगह पर भीड़ से बचने और एक से अधिक सफारी का आनंद लेने के लिए सफारी की बुकिंग काफी पहले से कराना आवश्यक है. सफारी की बुकिंग वन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन की जा सकती है.

बॉंधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों को देखने का सबसे अच्छा समय— शीत ऋतु (अक्टूबर- फरवरी) – यह बॉंधवगढ़ घूमने का आदर्श मौसम माना जाता है.

ग्रीष्म ऋतु (मार्च-जून) – भीषण गर्मी के बावजूद, ग्रीष्म ऋतु को अक्सर बॉंधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. शुष्क मौसम के कारण जानवर जिनमें दुर्लभ बंगाल टाइगर भी शामिल हैं, जलस्त्रोतों के पास एकत्रित होते हैं, जिससे उन्हें देखने की संभावना बढ़ जाती है.

बॉंधवगढ़ के आसपास—

अमरकंटक— अमरकंटक एक स्वर्गिक स्थल है जहां घूमने फिरने के भरपूर अवसर हैं और अनगिनत प्राकृतिक सुंदरताएं देखने को मिलती हैं.

जबलपुर— जबलपुर मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा अधिक आबादी वाला जिला है. इसे संस्कारधानी के नाम से भी जाना जाता है , जहां धुआँधार जलप्रपात, भेडा़घाट और चौंसठ योगिनी मंदिर जैसे प्रसिद्ध मनमोहक स्थलों की पहचान है.

कान्हा टाइगर रिजर्व— कान्हा टाइगर रिजर्व को कान्हा- किसली राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है. भारत के बाघ अभयारण्यों में से एक और मध्य प्रदेश राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है.

संजय डुबरी टाइगर रिजर्व— संजय डुबरी टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित प्रकृति का स्वर्ग है. यह रिजर्व उतना ही अनूठा है जितना कि विश्व प्रसिद्ध बाघ “ मोहन “ जिसे सन् 1951 में रीवा के तत्कालीन महाराजा मार्तण्ड सिंह ने खोजा और बचाया था.

मध्य प्रदेश के सबसे युवा बाघ अभ्यारण्यों में से एक होने के नाते इस मनमोहक जंगल में कई अनछुए अजूबे छिपे हुए हैं. यहाँ वन्यजीवों की बढ़ती आबादी के साथ-साथ, यह जंगल आपके भीतर के प्रकृति प्रेमी को इस छिपे हुए स्वर्ग को देखने के लिए आमंत्रित कर रहा है.

मैहर— शारदा देवी मंदिर मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित एक हिंदू तीर्थ स्थल है. यह मन्दिर देवी शारदा को समर्पित है और पहाड़ी की चोटी पर स्थित अपने मनोरम स्थान के लिए प्रसिद्ध है.

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान— अपने शीर्ष शिकारी जानवरों और झरनों के लिए प्रसिद्ध पन्ना राष्ट्रीय उद्यान एक छिपा हुआ रत्न है, जो रोमांचक वन्यजीव दर्शन और केन नदी पर शांत नौकाविहार का अवसर प्रदान करता है.

खजुराहो— खजुराहो में मध्य कालीन मन्दिरों का सबसे बड़ा समूह है, जो सुंदरता,प्रेम और रचनात्मक कलाओं को दर्शाने वाली जटिल मूर्तियों से सुशोभित है.

पेंच राष्ट्रीय उद्यान— मध्य प्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1965 में की गई थी. पेंच अभयारण्य का नाम पेंच नदी के नाम पर रखा गया है.

बॉंधवगढ़ में कहॉं ठहरें—

बॉंधवगढ़ में देश के सभी सुप्रसिद्ध पॉंच सितारा होटल्स ग्रुप के होटल से लेकर लॉज तक एक से बढ़कर एक होटल ठहरने के लिए उपलब्ध हैं. इसके अलावा सरकारी विश्राम गृह और मध्य प्रदेश टूरिज़्म डिपार्टमेंट के होटल भी हैं. आप अपने बजट के अनुसार कहीं भी ठहर सकते हैं.

बॉंधवगढ़ कैसे पहुँचे —

वायु मार्ग द्वारा — निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर और उमरिया में हैलीपैड उपलब्ध है. देश के प्रमुख शहरों जैसे नई दिल्ली और मुंबई से हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.

रेल मार्ग द्वारा— रेल से बॉंधवगढ़ पहुँचना भी आसान है. मुंबई, नई दिल्ली,जयपुर, आगरा, मथुरा, , ग्वालियर, भोपाल, हैदराबाद, बेंगलूरु, चेन्नई और रायपुर आदि जैसे देश के प्रमुख शहरों से उमरिया (35 किमी) , कटनी ( 90 किमी) और जबलपुर (180 किमी) रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेनें नियमित रूप से संचालित होती हैं. इसके बाद आप टैक्सी/ कैब से भी बॉंधवगढ़ पहुंच सकते हैं.

सड़क मार्ग द्वारासड़क मार्ग से बॉंधवगढ़ उमरिया, कटनी, जबलपुर, शहडोल और भोपाल से जुड़ा हुआ है. यहाँ पर आप अपनी गाड़ी से या कैब से भी आसानी से पहुँच सकते हैं.

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