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ज्योतिष एवं उपासना (9th Edition ) – janmaitri

ज्योतिष एवं उपासना

पं. राकेश राज मिश्र ‘जिज्ञासु’ कानपुर

ज्योतिष और उपासना को एक दूसरे का पूरक मानना चाहिए क्योंकि उपासना तत्व के सदुपयोग बिना ज्योतिष विद्या की उपयोगिता अधूरी है और ज्योतिष के मार्गदर्शन के बिना उपासना। समय किसी का भी सदैव एक सा नहीं रहता। अनुकूल समय का भरपूर लाभ और विपरीत समय के दुष्प्रभावों से मुक्ति इन दोनों के संयोग से निश्चित तौर पर पाई जा सकती है।

कई बार ऐसा होता है कि समय अनुकूल आने पर भी हम उससे संबंधित ग्रहों की दुर्बलता के कारण उस सुअवसर का भरपूर लाभ नहीं उठा पाते अथवा उससे वंचित रह जाते हैं। सुअवसर भी जीवन में रोज-रोज नहीं आते, एक बार चूक गए तो अगला कब मिलेगा, मिलेगा भी कि नहीं मिलेगा यह भविष्य के गर्भ में है।

ध्यान दें तो हमारे उत्कर्ष में प्रमुख रूप से तीन तत्वों की भूमिका होती है हमारी योग्यता, प्रयास और भाग्य। भाग्य की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। जन्म कुंडली में भाग्य भाव तथा भाग्येश की दुर्बल स्थिति हमें कई बार सफलता के द्वार से वापस लौटा देती है। इसका विश्वसनीय उपचार किया जा सकता है।

कई बार ऐसा होता है कि किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस स्तर के प्रयास की आवश्यकता होती है, हम नहीं कर पाते। ऐसा तृतीय भाव तथा तृतीयेश की दुर्बलता के कारण होता है इसका भी उपचार संभव है।

कई बार ऐसा होता है कि हम जानते समझते बहुत कुछ हैं किंतु सही समय पर सही ढंग से उसे व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसा प्रायः आत्मविश्वास की कमी के कारण होता है जिसका निर्धारण लग्न लग्नेश चंद्रमा और राशीश की स्थिति द्वारा किया जाता है। इसका उपचार भी संभव है। आत्म विश्वास बढ़ाने के विश्वसनीय उपाय उपलब्ध हैं।

जीवन में दांपत्य सुख अति महत्वपूर्ण है। इसके अभाव में सारे सुख निरर्थक लगते हैं। इसका निर्धारण सप्तम भाव और सप्तमेश की स्थिति द्वारा होता है और इसका भी उपचार भी संभव है। यद्यपि इसके लिए पति और पत्नी दोनों की ही कुंडली देखनी पड़ती है।

इसके अतिरिक्त संतान सुख, कारोबार, रोजगार आदि, जीवन के प्रत्येक विषय से संबंधित प्रत्येक समस्या का समाधान सुयोग्य ज्योतिषी के पास उपलब्ध होता है। इसके लिए ग्रह स्थिति के अनुसार सटीक उपचार की आवश्यकता होती है जिसमें उपासना प्रमुख है। रत्नों का सहयोग भी लिया जा सकता है और कुछ अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं।

यह संसार मन का व्यापार है और जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि ! मन स्वस्थ है तो सब अच्छा ही अच्छा और अस्वस्थ है तो सब बेकार। मन को स्वस्थ रखने के लिए ज्योतिषीय परामर्श अत्यंत उपयोगी है, वैसे ही जैसे कि शरीर के लिए चिकित्सकीय !

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