बुढ़ापे से मुलाकात (व्यंग) (14th Edition)

बुढ़ापे से मुलाकात (व्यंग) डॉ. गिरिधर राय, कोलकाता सुबह-सुबह किसी नेदरवाजा खटखटाया।धीरे से मैं बुदबुदाया—इतनी सुबह-सुबह कौन आया?माँ ने कहा, ...

स्वीकार हो (14th Edition)

स्वीकार हो डॉ. दुर्गेश कुमार शुक्ल, प्रयागराज मैं शब्दों का सीमित स्वरूप;अर्थों का पूर्ण विस्तार हो तुम।मैं प्रणय कुंज का ...

धरा और मेघ (14th Edition)

धरा और मेघ व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी (राजस्थान) तुमने बरस कर मुझ परबहुत उपकार किया हैमेरी धूल धूसरित काया परहरित ...

जीवन किस पथ मोड़ रहा है (14th Edition)

जीवन किस पथ मोड़ रहा है राकेश मणि त्रिपाठी थाम रहा किसके दामन को,किसका दामन छोड़ रहा है।मानव को अहसास ...

प्यार है या जादू (14th Edition)

प्यार है या जादू अमित मिश्रा, सरायकेला वक्त का है हँसी सितम,प्यार का है वक्त कम।आँखें दर्द से हैं नम,सपना ...

वजह तो पूछिए-ग़ज़ल (14th Edition)

वजह तो पूछिए……..ग़ज़ल डॉ. प्रमोद कुमार कुश ‘तन्हा’ (मुम्बई) छोड़ जाने की वजह तो पूछिए,लौट आने की वजह तो पूछिए।रूठने ...